राष्ट्रपिता बापू ने अंगरेजों को लाठी नहीं बेचने की दिलायी थी शपथ

प्रतिनिधि , मुंगेर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने घोरघटवासियों को यह शपथ दिलायी थी कि वे अब अंगरेजी हुकूमत को अपनी लाठियां नहीं बेचेंगे. क्योंकि उस लाठी का उपयोग स्वतंत्रता सेनानियों के विरुद्ध किया जाता था. इसी शपथ के बाद गांधी ने स्वयं घोरघट के लाठी को अपने हाथ में धारण किया था. सन् 1934 के […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | November 25, 2014 10:02 PM

प्रतिनिधि , मुंगेर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने घोरघटवासियों को यह शपथ दिलायी थी कि वे अब अंगरेजी हुकूमत को अपनी लाठियां नहीं बेचेंगे. क्योंकि उस लाठी का उपयोग स्वतंत्रता सेनानियों के विरुद्ध किया जाता था. इसी शपथ के बाद गांधी ने स्वयं घोरघट के लाठी को अपने हाथ में धारण किया था. सन् 1934 के भूकंप के बाद जब महात्मा गांधी घोरघट की धरती पर पहुंचे थे तो उन्हें ग्रामीणों ने जोरदार स्वागत किया था.

स्वागत दल में मेवालाल शास्त्री, अगरजीत पासवान, बोढ़न पासवान, धर्मदेव पासवान, भगवान दास एवं गणेश पासवान शामिल थे. इन्हीं लोगों ने भेंट स्वरूप लाठी भेंट की थी और वही लाठी बापू ने सदैव अपने साथ रखा. लाठियों का था व्यापक व्यापार घोरघट में लाठियों का व्यापक व्यापार था. दूरदराज से व्यापारी यहां के लाठियां को खरीदते थे. समीप के ही हवेली खड़गपुर के जंगल से लाठियां काट कर उसे तेल और चूने में डाल कर विशेष तकनीक से आग में सेंका जाता था जो अपनी विशिष्टता के कारण शासकों द्वारा इस्तेमाल किया जाता. मुगलकाल से लेकर अंगरेजी हुकुमरानों ने इस लाठी का उपयोग किया. यही कारण था कि जब बापू यहां आये थे तो उन्होंने घोरघटवासियों से शपथ दिला कर अंगरेजी हुकूमत को लाठी आपूर्ति नहीं करने की कसम खिलायी थी.