मुंगेर मेडिकल कॉलेज : बिना जांच के जमीन की रजिस्ट्री, 20 से अधिक रैयतों को नहीं मिला मुआवजा

जमालपुर प्रखंड के बांक पंचायत में हो रहा कार्य

जमीन से संबंधित कागजात सीओ जमालपुर के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश

मुंगेर. मुंगेर मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल निर्माण के लिए अधिगृहीत भूमि के मुआवजा का मामला अब तक लटका हुआ है. 20 से अधिक रैयतों की मुआवजा राशि जिला भू-अर्जन के खाते में पड़ी हुई है. सबसे हैरानी की बात यह है कि बिना जांच-पड़ताल के भू अर्जन विभाग ने ऐसे रैयतों से जमीन की रजिस्ट्री राज्यपाल के नाम करवा ली, जिसके परिवार में कई और दावेदार हैं, अब उनकी आपत्ति ने न सिर्फ मुश्किलों को बढ़ा दिया है, बल्कि ऐसे आपत्ति करने वाले दावेदारों से पुन: रजिस्ट्री कराने की भी नौबत आन पड़ेगी.

जिले के जमालपुर प्रखंड के बांक पंचायत में मुंगेर मेडिकल कॉलेज के भवन का निर्माण कार्य मंथर गति से चल रहा है. वहीं मुआवजा से वंचित परिवार में से कोई न कोई आकर निर्माण कार्य को बाधित कर देता है. फिर प्रशासनिक पहल पर रैयत को शांत करा कर कार्य शुरू कराया जाता है. बताया जाता है कि घर की बेटियों ने भी मुआवजा लेने के लिए जिला भू-अर्जन कार्यालय में आपत्ति डाल दी है. इसके कारण उन बेटियों व घर के बेटों में बार-बार विवाद का दौर भी चल रहा है. इसके अलावा कई लोग ऐसे हैं जो मेडिकल कॉलेज के लिए अधिगृहीत भूमि के मुआवजे में खुद को हिस्सेदार बताते हुए हिस्सेदारी के लिए कोर्ट में चले गये हैं और वहां टाइटिल सूट कर दिया है.

संदलपुर निवासी अनिल कुमार, दीपक कुमार यादव, सुनील कुमार यादव, अजय कुमार यादव, शिव कुमार यादव, सुरेंद्र कुमार समेत 10 लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अपने पूर्वज लालजी महतो के नाम से जमाबंदी वाली जमीन राज्यपाल के नाम रजिस्ट्री तो कर दी, लेकिन जब मुआवजे की बारी आयी, तो इनलोगों के घरों की बेटियां हिस्सेदार बनने पहुंच गयीं. इसके कारण इन लोगों का मुआवजा रोक दिया गया. इसके कारण मेडिकल कॉलेज निर्माण स्थल पर लगातार मुआवजा से वंचित रैयतों के परिवार की दबिश बढ़ती चली जा रही है.

बिना हिस्सेदारी तय किये ही जमीन कर दी रजिस्ट्री

मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए बांक पंचायत में रैयती भूमि का चयन किया गया, जिससे सतत लीज नीति के तहत चयनित भूमि का अधिग्रहण कर रैयतों से राज्यपाल के नाम रजिस्ट्री ले ली गयी. इस दौरान जिला भू-अर्जन विभाग या इससे जुड़े लोगों ने यह जांच नहीं की कि रैयतों के परिवार में और भी हिस्सेदार हैं या नहीं. सूत्रों की मानें, तो जमीन रजिस्ट्री के दौरान दलालों ने अधिकारियों को दिग्भ्रमित कर जमीन की रजिस्ट्री कराने का खेल शुरू करवा दिया. इसके कारण बिना हिस्सेदारों को खोजे ही जो रैयत उपलब्ध मिला उसी से जमीन की रजिस्ट्री राज्यपाल से करवा दी गयी. जब मुआवजा देने की बारी आयी, तो जमीन के अन्य हिस्सेदार आने लगे और आपत्ति देने लगे.

अब जिला भू-अर्जन कार्यालय ने प्रकाशित किया नोटिस

जिला भू-अर्जन कार्यालय ने अब नोटिस प्रकाशित किया है. इसमें बांक पंचायत के संदलपुर गांव निवासी अनिल कुमार, दीपक कुमार यादव, सुनील कुमार यादव, अजय कुमार यादव, शिव कुमार यादव, सुरेंद्र कुमार, सिरोमणी देवी, उशा देवी, उशमा देवी, अंजनी कुमार के नाम प्रकाशित नोटिस में कहा गया है कि मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए भूमि आपलोगों ने अपनी-अपनी स्वेच्छा से राज्यपाल बिहार के वास्ते सिविल सर्जन मुंगेर के नाम से बिहार रैयती भूमि सतत लीज नीति 2014 के तहत लीज निबंधित की है. इसमें जमाबंदी रैयत के वंशज भयमा कुमारी यादव व रेनुका यादव पिता स्व महादेव यादव ने मुआवजा भुगतान के लिए दावा-आपत्ति आवेदन समर्पित किया है. समाहर्ता मुंगेर द्वारा सुनवाई के लिए 30 मई 2025 में दिये गये निर्देश के अनुपालन में संबंधित कागजात सीओ जमालपुर को समर्पित करने के लिए आपलोगों को कई बार सूचना भेजी गयी, पर अब तक कागजात अंचल अधिकारी जमालपुर के समक्ष समर्पित नहीं किया गया है.

कहते हैं अधिकारी

जिला भू-अर्जन पदाधिकारी पंकज कुमार ने बताया कि 20-21 ऐसे रैयत हैं, जिसमें कुछ लोगों का कोर्ट में टाइटिल शूट चल रहा है. कुछ लोगों का पारिवारिक विवाद के कारण हिस्सेदारों ने दावा-आपत्ति दिया है. कई बार संबंधित रैयतों को कागजात सीओ जमालपुर के समक्ष समर्पित करने को लेकर गया है. लेकिन उनलोगों ने आज तक कागजात जमा नहीं किया. मुआवजे की राशि विभाग के खाते में सुरक्षित रखा गया है.

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Author: RANA GAURI SHAN

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