Maoist Leaders Surrender: तेलंगाना में नक्सल विरोधी अभियान में एक बड़ी सफलता सामने आई है. 7 मार्च को कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) के 130 कैडरों ने आत्मसमर्पण कर दिया. तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक बी शिवधर रेड्डी के अनुसार, इन कैडरों ने पुलिस को 124 हथियार भी सौंपे, जिनमें इंसास राइफल और AK-47 राइफलें शामिल हैं. बताया गया कि इनमें से कई हथियार पहले पुलिस बल से लूटे गए थे. इस बीच पूर्व माओवादी नेता मल्ला राजिरेड्डी ने तेलंगाना पुलिस के सामने अपने आत्मसमर्पण की आधिकारिक कहानी को चुनौती दी है. उन्होंने कहा कि उन्होंने आत्मसमर्पण नहीं किया था, बल्कि उन्हें गिरफ्तार किया गया था.
राजिरेड्डी ने अपनी गिरफ्तारी की परिस्थितियों को याद करते हुए आरोप लगाया कि अक्सर वरिष्ठ माओवादियों को पकड़ने के बाद अधिकारियों द्वारा उनकी गिरफ्तारी को स्वेच्छा से किया गया आत्मसमर्पण बताया जाता है. उन्होंने कहा, ‘मैंने आत्मसमर्पण नहीं किया था, मुझे 18 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था. हमने तय किया था कि इस मुद्दे को कानून के दायरे में और अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाएगा. लेकिन जिसे भी पकड़ा जाता है, सरकार उसे आत्मसमर्पण बताकर पेश करती है.’
राजिरेड्डी के साथ ही तिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवूजी भी पकड़े गए. उन्होंने कहा कि कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी), जो लंबे समय से दूरदराज के इलाकों में वर्ग संघर्ष और गुरिल्ला युद्ध के जरिए सक्रिय रही है, उसके लिए अब अपनी पारंपरिक गतिविधियों को जारी रखना काफी कठिन हो सकता है. उनका मानना है कि संगठन खुले तौर पर सशस्त्र संघर्ष जारी रखने के बजाय गुप्त रूप से लोगों को संगठित कर सकता है. इसके लिए वह नए इलाकों में जाकर खुद को फिर से संगठित करने और पार्टी की आगे की रणनीति तय करने की कोशिश कर सकता है.
कौन हैं देवूजी?
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य तिप्पिरी तिरुपति को देवूजी और कुम्मा दादा के नाम से भी जाना जाता है. 62 वर्षीय देवूजी ने अपने जीवन के लगभग 44 वर्ष भूमिगत रहते हुए बिताए हैं और वे माओवादी संगठन के सबसे वरिष्ठ जीवित नेताओं में गिने जाते हैं.
तेलंगाना के जगतियाल जिले के कोरुतला क्षेत्र के रहने वाले देवूजी ने वर्ष 1978 में रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन के जरिए इस आंदोलन से जुड़ाव शुरू किया था. इसके बाद संगठन में उनकी भूमिका लगातार बढ़ती गई.
उन्होंने 1980 के दशक में एक सशस्त्र दस्ते के सदस्य के रूप में काम शुरू किया और आगे चलकर सिरोंचा तथा पेरिमिला के वन क्षेत्रों में कमांडर की जिम्मेदारी संभाली. वर्ष 2001 तक वे संगठन के केंद्रीय सैन्य आयोग के सदस्य बन गए थे. बाद में 2017 में उन्हें माओवादी पार्टी की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली इकाई पोलित ब्यूरो में शामिल किया गया.
भविष्य में गुरिल्ला युद्ध लड़ना संभव नहीं- राजिरेड्डी
वरिष्ठ माओवादी नेता और केंद्रीय समिति के सदस्य मल्ला राजिरेड्डी, जिन्हें संग्राम के नाम से भी जाना जाता है. उन्होंने सशस्त्र संघर्ष के बारे में कहा, ‘मुझे लगता है कि जो पार्टी लंबे समय से अंदरूनी क्षेत्रों में वर्ग संघर्ष और गुरिल्ला युद्ध लड़ रही है, उसके लिए भविष्य में इस तरह की गतिविधियों को जारी रखना मुश्किल हो सकता है. ऐसे में खुले सशस्त्र संघर्ष के बजाय वह गुप्त रूप से जनता को संघर्ष के लिए संगठित करने का रास्ता चुन सकती है. इसके लिए वे बाहरी क्षेत्रों में जाकर खुद को फिर से संगठित करेंगे और पार्टी का मार्गदर्शन करेंगे.’
उन्होंने कहा कि अब माओवादी आंदोलन समाप्त हो चुका है. उनका मानना है कि अब संवैधानिक प्रावधानो के तहत अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने का समय आ गया है.
कौन हैं राजिरेड्डी?
76 वर्षीय संग्राम ने 1971 में आंदोलन से जुड़ने के बाद अपने जीवन के करीब 46 साल भूमिगत रहते हुए बिताए. वह तेलंगाना के पेद्दापल्ली जिले के रहने हैं. उन्होंने गोदावरीखानी की कोयला पट्टी में मजदूरों को संगठित करने में अहम भूमिका निभाई थी. बीते कई दशकों के दौरान उन्होंने संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. इनमें वन समिति के सचिव के साथ-साथ महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल में गतिविधियों की निगरानी करने वाले दक्षिण-पश्चिम क्षेत्रीय ब्यूरो के प्रभारी का पद भी शामिल रहा. इससे पहले उन्हें वर्ष 2007 में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन 2009 में जमानत मिलने के बाद वे दोबारा भूमिगत हो गए. हाल के वर्षों में वे दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति के मार्गदर्शक के तौर पर सक्रिय रहे.
पुलिस ने क्या-क्या बरामद किया?
वहीं, पुलिस अधिकारियों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वालों में तीन स्टेट कमेटी सदस्य, एक रीजनल कमेटी सदस्य, 10 डिविजनल कमेटी सदस्य, 46 एरिया कमेटी सदस्य और 70 अन्य पार्टी सदस्य शामिल हैं. इन माओवादियों ने पुलिस को कुल 124 हथियार सौंपे, जिनमें 1 INSAS LMG राइफल, 31 AK-47 राइफलें, 21 INSAS राइफलें, 20 SLR राइफलें, 18 .303 राइफलें और 33 अन्य हथियार शामिल हैं. पुलिस महानिदेशक बी शिवधर रेड्डी ने पत्रकारों से कहा, जिन कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) ने हथियार पहले पुलिस बल से लूटे थे. यह सरकार और तेलंगाना पुलिस के लिए बड़ी सफलता है.
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मुख्यमंत्री भी कार्यक्रम के दौरान रहे मौजूद
यह आत्मसमर्पण कार्यक्रम हैदराबाद में स्थित इंटीग्रेटेड कमांड और कंट्रोल सेंटर में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की मौजूदगी में आयोजित किया गया. आत्मसमर्पण कार्यक्रम के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री रेड्डी ने शीर्ष माओवादी नेताओं से भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में आने की अपील की. उन्होंने विशेष रूप से केंद्रीय समिति के सदस्य गणपति से आत्मसमर्पण कर तेलंगाना के पुनर्निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया.
मुख्यमंत्री ने आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को भी बधाई दी और कहा कि राज्य सरकार की अपील को स्वीकार कर उन्होंने मुख्यधारा का रास्ता चुना है. उन्होंने कहा कि सरकार कानून के दायरे में रहकर नक्सलियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने के लिए तैयार है. जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार लंबित मामलों की समीक्षा के लिए एक समिति भी गठित कर सकती है.
31 मार्च तक नक्सल अभियान समाप्त करना चाहती है भारत सरकार
भारत सरकार ने नक्सल आंदोलन को 31 मार्च 2026 तक खत्म करने का डेटलाइन तय किया है. इसको लेकर देश के सभी नक्सल प्रभावित इलाकों में सघन कार्रवाई जारी है. खासकर, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, ओड़िशा और झारखंड के लिए विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया है. नक्सल उन्मूलन अभियान में जुड़े जवानों को हर तरह की अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सिलयों से लोहा लेने वाले, जवानों की हौसलाअफजाई के लिए लगातार उनके बीच जाने के साथ-साथ, उनको सुविधाएं मुहैया कराई हैं. इधर, नक्सलियों से भी आत्मसमर्पण की लगातार अपील की जा रही है और ऐसा नहीं करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है. इस पूरे अभियान का असर भी दिखने लगा है.
