श्रद्धा-भक्ति के साथ मनी हरितालिका तीज

मुंगेर : गुरुवार को हरितालिका तीज व्रत श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया गया़ सुहागिन स्त्रियां अपने सुहाग को अखंड बनाए रखने तथा अविवाहित युवतियों ने अपने मन मुताबिक वर पाने की आकांक्षा से पूरी नेम-निष्ठा के साथ हरितालिका तीज का व्रत किया़ साथ ही भगवान शंकर व माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना की व रात्रि जागरण […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | August 25, 2017 6:31 AM

मुंगेर : गुरुवार को हरितालिका तीज व्रत श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया गया़ सुहागिन स्त्रियां अपने सुहाग को अखंड बनाए रखने तथा अविवाहित युवतियों ने अपने मन मुताबिक वर पाने की आकांक्षा से पूरी नेम-निष्ठा के साथ हरितालिका तीज का व्रत किया़ साथ ही भगवान शंकर व माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना की व रात्रि जागरण किया.

भक्ति-भाव के साथ हरतालिका तीज का व्रत संपन्न हो गया़ सुहागिन महिलाएं व अविवाहित युवतियों ने पूरे नियम निष्ठा के साथ व्रत रखा़ दिन भर उपवास में रहने के बाद संध्याकाल में डलिया भरा गया तथा पूरे विधि-विधान से महिलाओं ने हरितालिका तीज की कथा सुनी़ वहीं देर रात तक भक्ति जागरण का दौर चलता रहा़ बताया जाता है कि सर्वप्रथम इस व्रत को माता पार्वती ने भगवान शिव शंकर के लिए रखा था. जिस कारण से इस दिन विशेष रूप से गौरीशंकर की ही पूजन-अर्चना की गयी़

व्रत करने वाली स्त्रियां सूर्योदयकाल से पूर्व ही जग गयी तथा नहा धोकर पूरा श्रृंगार करके पूजन के लिए केले के पत्तों से मंडप बनाकर गौरीशंकर की प्रतिमा स्थापित की. इसके साथ पार्वती जी को सुहाग का सारा सामान चढ़ाया गया़ उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और बिहार में मनाया जाने वाला यह त्योहार करवाचौथ से भी कठिन माना जाता है क्योंकि जहां करवाचौथ में चांद देखने के बाद व्रत तोड़ दिया जाता है वहीं इस व्रत में पूरे दिन निर्जल व्रत किया जाता है और अगले दिन पूजन के पश्चात ही व्रत तोड़ा जाता है. इस व्रत से जुड़ी एक मान्यता यह है कि इस व्रत को करने वाली स्त्रियां पार्वती जी के समान ही सुख-पूर्वक पतिरमण करके शिवलोक को जाती हैं.