Motihari: गहवा माई मंदिर में दशहरा के दौरान रील्स बनाने पर लगी पाबंदी

नवरात्र को लेकर रक्सौल व इसके आसपास के इलाके में स्थित देवी शक्तिपीठ पर विशेष इंतजाम किये जा रहे है.

Motihari: रक्सौल. नवरात्र को लेकर रक्सौल व इसके आसपास के इलाके में स्थित देवी शक्तिपीठ पर विशेष इंतजाम किये जा रहे है. इसी कड़ी में वीरगंज स्थित शक्तिपीठ गहवामाई मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया है. पर्व की शुरुआत घटस्थापना से ही मंदिर में सुबह से श्रद्धालुओं और भक्तजनों की भीड़ उमड़ने की संभावना जताई गई है. माइस्थान संचालक समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए हैं. समिति का कहना है कि हर श्रद्धालु आसानी से पूजा-अर्चना कर सके, इसके लिए स्वयंसेवक लगातार सक्रिय रहेंगे. मंदिर परिसर में सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है. साथ ही पुलिस प्रशासन ने ड्रोन से निगरानी करने की भी तैयारी की है. भीड़ और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में मोबाइल फोन के प्रयोग, टिक-टॉक बनाने (रील्स), फोटो खींचने और वीडियो रिकॉर्डिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है. समिति के अध्यक्ष नरेंद्र साह ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे महंगे गहने पहनकर न आएं, बच्चों का विशेष ध्यान रखें और किसी भी समस्या की स्थिति में तुरंत समिति से संपर्क करें. हर साल बड़ा दशैं (दशहरा) के अवसर पर गहवामाई मंदिर परिसर में भव्य मेला लगता है. इसमें नेपाल के पर्सा, बारा, रौतहट, मकवानपुर, चितवन जिलों के अलावा भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. विशेष रूप से फूलपाती से नवमी तक मेला बहुत ही उत्साहपूर्ण रहता है. वहीं, अष्टमी के दिन मंदिर में कबूतर, बकरा और बकरे की बलि देने की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है. इतिहासकारों के अनुसार, गहवामाई मंदिर में यह मेला सैकड़ों वर्षों से दशहरा के अवसर पर लगातार आयोजित होता आ रहा है.

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By AJIT KUMAR SINGH

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