मोतिहारी: पूर्वी चंपारण में बाल श्रम के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बाद अब प्रशासन विमुक्त कराए गए बच्चों के पुनर्वास पर विशेष फोकस कर रहा है. श्रम संसाधन विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में मुक्त कराए गए बच्चों को दोबारा बाल श्रम की चपेट में जाने से रोकने के लिए शिक्षा, आर्थिक सहायता और सरकारी योजनाओं से जोड़ने की पहल शुरू की गई है.
होटल, ढाबों और ईंट-भट्ठों पर हुई थी छापेमारी
श्रम अधीक्षक सत्यप्रकाश ने बताया कि श्रम प्रवर्तन अधिकारियों के नेतृत्व में गठित विशेष धावा दल ने जिले के होटल, ढाबों, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों, गैरेज और ईंट-भट्ठों पर अचानक छापेमारी की थी. इस दौरान कई बच्चे खतरनाक और शोषणकारी परिस्थितियों में काम करते मिले. कार्रवाई के बाद बच्चों को मुक्त कराया गया और बाल श्रम कराने वाले नियोक्ताओं के खिलाफ संबंधित थानों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई.
25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी
श्रम अधीक्षक ने बताया कि बिहार सरकार की नीति के तहत रेस्क्यू किए गए किशोर श्रमिकों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है. इस राशि का उद्देश्य बच्चों को शिक्षा या कौशल विकास से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है.
150 बच्चों का स्कूलों में कराया गया नामांकन
विमुक्त कराए गए बच्चों को दोबारा मजदूरी के चक्र में फंसने से बचाने के लिए उनका नजदीकी सरकारी स्कूलों में नामांकन कराया जा रहा है. विभाग के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान करीब 150 बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराया जा चुका है.
परिवारों को भी मिल रहा सरकारी योजनाओं का लाभ
प्रशासन बच्चों के परिवारों को भी राशन, आवास और रोजगार जैसी विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ रहा है, ताकि आर्थिक मजबूरी के कारण बच्चों को दोबारा मजदूरी के लिए न भेजना पड़े.
बाल श्रम कराने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई
श्रम अधीक्षक ने कहा कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से किसी भी प्रतिष्ठान में काम कराना गंभीर अपराध है. ऐसे मामलों में नियोक्ताओं पर 20 हजार से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना और दो साल तक की जेल हो सकती है. उन्होंने लोगों से अपील की कि कहीं भी बाल श्रम दिखने पर तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना दें.
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