Motihari: रक्सौल .चंपारण के लिए बहुप्रतिक्षित रक्सौल एयरपोर्ट का प्रोजेक्ट एक बार फिर जमीन अधिग्रहण की बाधाओं में उलझता नजर आ रहा है. केंद्र और राज्य सरकार भले ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर सक्रियता दिखा रही हो, लेकिन मुआवजे की राशि को लेकर किसानों के विरोध ने प्रोजेक्ट की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है.
हालांकि, 17 जनवरी को पूर्वी चंपारण जिले में समृद्धि यात्रा के दौरान पहुंचे मुख्यमंत्री की सभा में उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने यह घोषणा की थी कि रक्सौल एयरपोर्ट के निविदा का काम एक माह के अंदर शुरू हो जाएगा, परंतु यहां जमीनी हकीकत यह है कि एयरपोर्ट विस्तार के लिए जिस मौजा की जमीन का अधिग्रहण किया जाना है, वहां के किसान तय मुआवजे की राशि को कम बताते हुए अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं.मुआवजे पर तकरार : पहले चार गुना, अब तीन गुना क्यों?
रैयतों का कहना है कि उसी मौजा में पहले जब एसएसबी कैंप और सैनिक रोड के लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया, उस दर में और इस दर में काफी अंतर है. किसानों ने सीधा बताया कि पहले जो सर्किल रेट है, उसका चार गुणा भुगतान किया गया और अब सर्किल रेट का तीन गुणा ही दिया जा रहा है. इसी कारण से हमलोग विरोध कर रहे हैं.विभाग का पक्ष
भू-अर्जन विभाग का कहना है कि अधिग्रहण की दरें पूरी तरह सरकारी मानकों और नियमों के अनुसार तय की गई हैं. विभाग की मानें तो प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं है.किसानों ने दी चेतावनी
इधर, मंगलवार को किसानों के एक समूह ने इस मामले को लेकर तिरहुत कमिश्नरी में अधिकारियों से मुलाकात की है. किसानों का कहना है कि यदि प्रशासन उनकी बातों को नहीं मानती है तो वे आंदोलन का रूख अख्तियार करेंगे और आवश्यक कानूनी लड़ाई भी लड़ेंगे. फिलहाल, रक्सौल एयरपोर्ट के भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को समय रहते पूरा कर लेना प्रशासन के लिए चुनौती का विषय बना हुआ है ताकि उप मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार रक्सौल एयरपोर्ट का काम समय सीमा के अंदर शुरू हो सके. चंपारण में बनने वाला रक्सौल का एयरपोर्ट दोनों चंपारण के नागरिकों के साथ-साथ सीतामढ़ी और नेपाल के लगभग 20 से अधिक जिला के नागरिकों के लिए लाभकारी साबित होगा.व्यापारिक आवागमन के लिए संजीवनी है यह एयरपोर्ट
रक्सौल एयरपोर्ट न केवल पूर्वी और पश्चिमी चंपारण के लिए, बल्कि सीतामढ़ी और पड़ोसी देश नेपाल के लगभग 20 से अधिक जिलों के लिए व्यापारिक और आवागमन के दृष्टिकोण से मील का पत्थर साबित होगा. फिलहाल, समय सीमा के भीतर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
