मधुबन में दिखा विलुप्त गिद्धों का समूह

लगभग विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुके गिद्धों का झुंड अचानक दिखाई देना चर्चा और कौतूहल का विषय बन गया है.

-सेमल के पेड़ पर जमाया डेरा – भोजन की उपलब्धता या मौसम में बदलाव से जुड़ा हो सकता है यह प्रवास मधुबन (पूचं). लगभग विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुके गिद्धों का झुंड अचानक दिखाई देना चर्चा और कौतूहल का विषय बन गया है. मधुबन प्रखंड की नौरंगिया माधोपुर पंचायत के माधोपुर वार्ड संख्या आठ में शुक्रवार को शाम एक सेमल के पेड़ पर 50 से 60 की संख्या में गिद्ध देखे गए. सरपंच संजय कुमार कुशवाहा ने बताया कि दो दशक बाद इस तरह का गिद्धों का बड़ा समूह एक साथ देखा गया है. जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर जुट गए. तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं. अंधेरा होने तक सभी गिद्ध उसी पेड़ पर बैठे रहे. पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, बीते वर्षों में डाइक्लोफेनिक जैसी पशु औषधियों के उपयोग, आवासीय क्षेत्रों में बदलाव और भोजन की कमी के कारण गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट आयी थी. हाल के वर्षों में प्रतिबंधित दवाओं पर रोक और पर्यावरणीय संतुलन में आंशिक सुधार के चलते कुछ क्षेत्रों में गिद्धों की वापसी के संकेत मिलने लगे हैं. हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में गिद्धों का अचानक एक स्थान पर पहुंचना वैज्ञानिक दृष्टि से अध्ययन का विषय है. यह प्रवास, भोजन की उपलब्धता या मौसम में बदलाव से जुड़ा हो सकता है. दूसरी ओर, ग्रामीणों के बीच इसे लेकर अनहोनी की आशंका भी देखी जा रही है. विशेषज्ञ इसे प्राकृतिक और पर्यावरणीय प्रक्रिया मान रहे हैं. फिलहाल वन विभाग और पर्यावरण से जुड़े जानकार इस पर नजर रखे जाने की आवश्यकता जता रहे हैं. ताकि गिद्ध संरक्षण और उनके व्यवहार को लेकर ठोस निष्कर्ष निकाले जा सके. — यह घटना दुर्लभ है. गिद्ध की तीन प्रजातियां पायी जाती हैं. इनमें एक गिद्ध, दूसरा गरूड़ व तीसरा बाज है. यह जांच का विषय है. गिद्ध का कंजर्वेशन भी किया जा रहा है. कभी-कभी वहां से भाग भी जाते हैं. यह सब देखने के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा. डॉ विनय कुमार, पशु चिकित्सा पदाधिकारी.

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By DIGVIJAY SINGH

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