1 से 7 अगस्त तक मनाया जाएगा विश्व स्तनपान सप्ताह, मधुबनी में चलेगा जागरूकता कार्यक्रम

मधुबनी में 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 मनाया जाएगा. स्वास्थ्य विभाग जन्म के पहले घंटे में स्तनपान कराने के महत्व पर जोर दे रहा है, जिससे शिशु मृत्यु दर 20% तक कम हो सकती है. इस वर्ष की थीम 'जीवन की स्थायी शुरुआत के लिए स्तनपान: कारगर व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना' है.

World Breastfeeding Week 2026: मधुबनी में 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 मनाया जाएगा. इस दौरान जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम, कार्यशालाएं और विशेष गतिविधियां आयोजित की जाएंगी. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जन्म के पहले घंटे के भीतर नवजात को स्तनपान कराने से मृत्यु का खतरा 20 प्रतिशत तक कम हो जाता है. साथ ही डायरिया और निमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम भी काफी घट जाता है. विभाग का उद्देश्य अधिक से अधिक माताओं को स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूक करना है.

पहले छह माह तक केवल मां का दूध देने की सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म के बाद पहले छह माह तक शिशु को केवल मां का दूध ही देना चाहिए. इससे बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है, साथ ही उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मां का दूध नवजात के लिए पहला प्राकृतिक टीका है, जो उसे कई तरह के संक्रमणों और बीमारियों से बचाने में मदद करता है.

विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 की थीम

इस वर्ष विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 की थीम "जीवन की स्थायी शुरुआत के लिए स्तनपान : कारगर व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना" रखी गई है. इसका उद्देश्य स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए मजबूत सहायता प्रणाली विकसित करना और हर स्तर पर इसकी सुरक्षा, प्रचार और समर्थन सुनिश्चित करना है.

स्वास्थ्य संस्थान होंगे 'दूध की बोतल मुक्त परिसर'

सिविल सर्जन ने बताया कि सदर अस्पताल सहित जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों को दूध की बोतल मुक्त परिसर घोषित किया जाएगा. विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान प्रसव केंद्रों पर माताओं को स्तनपान के लाभों की जानकारी दी जाएगी. कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए प्रत्येक स्वास्थ्य संस्थान में नोडल अधिकारी और पोस्ट नेटल वार्ड की प्रभारी को नोडल पर्सन बनाया गया है.

स्वास्थ्य संस्थानों में बनेंगे स्तनपान कक्ष

विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में स्तनपान कक्ष भी बनाए गए हैं. इसके अलावा एक दिन सभी स्वास्थ्य संस्थानों में स्वस्थ शिशु प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी. इसमें माताओं को स्तनपान के महत्व और शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरी जानकारी दी जाएगी. आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी माताओं को जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराने और छह माह तक केवल स्तनपान कराने के लिए प्रेरित करेंगी.

मां का दूध है बच्चों का प्राकृतिक इम्युनिटी बूस्टर

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. डी.के. झा ने बताया कि मां के दूध में बच्चे के लिए आवश्यक प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज, पानी और एंजाइम पर्याप्त मात्रा में मौजूद होते हैं. इससे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और भविष्य में कई संक्रमणों व गैर-संचारी बीमारियों का खतरा भी कम हो जाता है.

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By Anil kunar jha

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