Animal Doctor Shortage: जिले में पशु चिकित्सकों की भारी कमी के कारण पशुओं के इलाज और टीकाकरण व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ रहा है. पशुपालन विभाग के अनुसार, जिले के 21 प्रखंडों में से 18 प्रखंड पशु चिकित्सालय बिना पशु चिकित्सक के संचालित हो रहे हैं. इससे पशुपालकों को इलाज के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
45 डॉक्टरों के तबादले के बाद बढ़ी समस्या
विभागीय जानकारी के अनुसार जून माह में मधुबनी से एक साथ 45 पशु चिकित्सकों का दूसरे जिलों में स्थानांतरण कर दिया गया. इसके बदले जिले में केवल चार नए पशु चिकित्सकों की ही पदस्थापना हुई. इसके बाद अधिकांश प्रखंडों में पशु चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हो गई हैं.
9 लाख पशुओं का टीकाकरण प्रभावित
जिले में खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) रोग से बचाव के लिए 15 जुलाई से टीकाकरण अभियान शुरू किया गया था. विभाग का लक्ष्य 9 लाख से अधिक पशुओं का टीकाकरण करना है.
हालांकि मानदेय भुगतान की मांग को लेकर चयनित 350 वैक्सीनेटरों ने टीकाकरण का बहिष्कार कर रखा है. विभाग उपलब्ध कर्मियों के जरिए अभियान चला रहा है, लेकिन 45 दिनों के अभियान के 19 दिन बीतने के बाद अब तक केवल करीब 80 हजार पशुओं का ही टीकाकरण हो सका है. यह अभियान 14 अगस्त तक प्रस्तावित है.
पशुपालकों को इलाज के लिए करनी पड़ रही मशक्कत
पशुपालक संतोष कुमार शर्मा ने बताया कि कई दिनों से पशु अस्पताल का चक्कर लगाने के बावजूद चिकित्सक नहीं मिलने से मवेशियों का इलाज नहीं हो पा रहा है. इससे पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है.
क्या बोले जिला पशुपालन पदाधिकारी
जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. राजेश ने बताया कि चिकित्सकों की कमी की जानकारी मुख्यालय को भेज दी गई है, लेकिन अब तक नई नियुक्ति नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि उपलब्ध संसाधनों से ही सभी जगह काम कराया जा रहा है. साथ ही वैक्सीनेटरों की हड़ताल के कारण टीकाकरण अभियान भी अपेक्षित गति से नहीं चल पा रहा है.
