28 साल बाद सकरी चीनी मिल में फिर गूंजेगी मशीनों की आवाज, नए साल पर किसानों के लिए गुड न्यूज

Bihar Sugar Mill: मधुबनी की ऐतिहासिक सकरी चीनी मिल को दोबारा चालू करने की घोषणा से किसानों और पुराने कर्मचारियों में खुशी है. मिल के फिर से चालू होने से गन्ना खेती, रोजगार और लोकल अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी.

Bihar Sugar Mill: मधुबनी जिले की सकरी चीनी मिल को दोबारा चालू करने की घोषणा से पूरे इलाके में खुशी का माहौल है. 28 वर्षों से इस मिल के दोबारा शुरू होने का इंतजार कर रहे किसानों और पुराने कर्मचारियों को अब एक नई उम्मीद दिखाई दे रही है. सकरी चीनी मिल कभी पूरे मिथिला क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती थी. इस मिल की स्थापना 1933 में दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह ने सूगर मिल कंपनी लिमिटेड के तहत कराई थी. उस समय यहां बनने वाली चीनी की मांग देश ही नहीं, विदेशों तक थी. मिल के पास गन्ना ढुलाई के लिए अपना निजी रेलवे नेटवर्क भी था, जिससे किसानों को बड़ी सुविधा मिलती थी.

मिल के चलते कमाते थे लोग

चीनी मिल के चलते इस क्षेत्र के किसान गन्ने की खेती से अच्छी आमदनी कमाते थे. गन्ना एक नकदी फसल थी, जिससे किसान अपने बच्चों की पढ़ाई, घर-परिवार का खर्च और बेटियों की शादी तक आसानी से कर पाते थे. मिल में काम करने वाले सैकड़ों कर्मचारियों और मजदूरों के परिवारों का जीवन भी इसी पर निर्भर था. सकरी चीनी मिल हजारों लोगों के रोजगार का बड़ा साधन थी.

1997 में मिल के बंद हो जाने से स्थिति पूरी तरह बदल गई. मिल में करीब 1100 कर्मचारी काम करते थे. इनमें लगभग 1100 मजदूर काम करते थे. मिल बंद होते ही कर्मचारियों और मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया. कई परिवारों को भारी आर्थिक तंगी झेलनी पड़ी. पुराने कर्मचारी बताते हैं कि अभाव और बीमारी के कारण कई लोगों की मौत तक हो गई. जो लोग बचे, वे लंबे समय तक गरीबी और बेरोजगारी से जूझते रहे.

क्या प्रभाव पड़ा

चीनी मिल बंद होने का असर किसानों पर भी गहरा पड़ा. इस इलाके में गन्ना ही मुख्य फसल थी. मिल बंद होते ही गन्ने की खेती धीरे-धीरे खत्म होने लगी. गन्ने से जुड़े गुड़ उद्योग भी पूरी तरह बंद हो गए.

सकरी चीनी मिल का क्षेत्र काफी बड़ा था. मिल का परिसर लगभग 36 एकड़ में फैला है. इसमें से अधिकतर हिस्सा दरभंगा जिले के मनीगाछी प्रखंड में और कुछ हिस्सा मधुबनी जिले के पंडौल प्रखंड में आता है. प्रशासनिक कामकाज मधुबनी से ही संचालित होता था. रेल के जरिए गन्ना लाने के लिए आसपास के कई स्टेशनों पर विशेष व्यवस्था थी.

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आज क्या है स्थिति

आज की स्थिति में मिल परिसर में बड़े-बड़े पेड़ उग आए हैं और भवन जर्जर हो चुके हैं. कुछ मशीनों को स्क्रैप में बेचने की कोशिश भी हुई, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध से उन्हें बचा लिया गया. दिसंबर 2025 के अंत में बिहार सरकार ने सात निश्चय-3 कार्यक्रम के तहत सकरी, रैयाम और लोहट चीनी मिल को फिर से चालू करने का निर्णय लिया है.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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