मधुबनी की कविता देवी ने बदली सोच, घरेलू प्रसव छोड़ बनीं सुरक्षित मातृत्व की संदेशवाहक

मधुबनी की कविता देवी, जो कभी पारंपरिक दाई थीं, अब सुरक्षित प्रसव की मजबूत पक्षधर बन गई हैं. उन्होंने घरेलू प्रसव बंद कर संस्थागत प्रसव के लिए महिलाओं को प्रेरित करना शुरू कर दिया है.

Madhubani News: मलंगिया गांव की कविता देवी कभी अपने इलाके में घरेलू प्रसव कराने वाली पारंपरिक दाई के रूप में जानी जाती थीं. वर्षों तक उन्होंने गांव की महिलाओं का घर पर ही प्रसव कराया. अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने करीब 20 से 25 महिलाओं का प्रसव कराया. उस समय गांव में अस्पताल तक पहुंच, जागरूकता और स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित थीं, इसलिए लोग उन पर भरोसा करते थे.

बदली सोच, बदला जीवन का उद्देश्य

समय के साथ स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव और सुरक्षित मातृत्व को लेकर बढ़ी जागरूकता ने कविता देवी की सोच भी बदल दी. करीब पांच वर्ष पहले उन्होंने घरेलू प्रसव कराना पूरी तरह बंद कर दिया.

अब वह गांव में सुरक्षित प्रसव की मजबूत पक्षधर हैं और गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित करती हैं. उनका मानना है कि मां और नवजात की सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी में अस्पताल में प्रसव कराना सबसे सुरक्षित विकल्प है.

घर बुलाने पर भी अस्पताल जाने की देती हैं सलाह

कविता देवी बताती हैं कि आज भी आसपास के गांवों और मोहल्लों की महिलाएं जब उन्हें प्रसव कराने के लिए घर बुलाती हैं तो वह साफ तौर पर घर पर प्रसव कराने से मना कर देती हैं. वह गर्भवती महिला और उसके परिजनों को तत्काल अस्पताल जाने की सलाह देती हैं.

कई बार वह स्वयं भी गर्भवती महिला के साथ अस्पताल जाती हैं और यह सुनिश्चित करने का प्रयास करती हैं कि प्रसव सुरक्षित वातावरण में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी में हो.

उनका कहना है कि मां और नवजात की सुरक्षा सबसे पहले है. इसलिए किसी भी परिस्थिति में घर पर प्रसव नहीं कराना चाहिए.

अस्पतालों में उपलब्ध हैं जरूरी सुविधाएं

कविता देवी के अनुसार पहले अस्पतालों में संसाधनों की कमी के कारण लोग घर पर प्रसव को बेहतर विकल्प मानते थे. अब स्थिति काफी बदल चुकी है. सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रशिक्षित स्टाफ नर्स, एएनएम, जीएनएम और चिकित्सक उपलब्ध हैं.

प्रसव कक्ष, आवश्यक दवाएं, जांच, एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं की सुविधा भी पहले की तुलना में बेहतर हुई है. ऐसे में सुरक्षित प्रसव के लिए अस्पताल जाना जरूरी है.

समुदाय में बन गयीं सुरक्षित मातृत्व की प्रेरक

अब कविता देवी गांव की महिलाओं और उनके परिवारों को समय पर गर्भावस्था जांच कराने, प्रसव पीड़ा शुरू होते ही अस्पताल पहुंचने और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने के लिए लगातार प्रेरित कर रही हैं.

एक समय घर-घर जाकर प्रसव कराने वाली कविता देवी आज सुरक्षित मातृत्व की संदेशवाहक बन चुकी हैं. उनकी यह यात्रा बताती है कि सही जानकारी, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और व्यक्तिगत पहल मिलकर पूरे समुदाय की सोच बदल सकती हैं. इससे मातृ एवं नवजात मृत्यु के जोखिम को कम करने में भी मदद मिल सकती है.

मां और नवजात की सुरक्षा के लिए अस्पताल में ही कराएं प्रसव: सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने कहा कि सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक गर्भवती महिला का संस्थागत प्रसव बेहद जरूरी है. आशा कार्यकर्ता, एएनएम और सीएचओ लगातार गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें समय पर प्रसवपूर्व जांच, संस्थागत प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल के लिए प्रेरित कर रहे हैं.

उन्होंने सभी परिवारों से अपील की कि प्रसव पीड़ा शुरू होते ही बिना देरी किए नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य संस्थान पहुंचें, ताकि मां और नवजात दोनों सुरक्षित रह सकें.

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By Anil kunar jha

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