Madhubani News: अवैध निजी स्वास्थ्य केंद्रों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई एक बार फिर सवालों के घेरे में है. शिकायत के बाद जांच होती है, अनियमितता सामने आती है, लेकिन कार्रवाई के बजाय मामला नोटिस और फाइलों तक सीमित रह जाता है. बाजार समिति के सामने संचालित मां दुर्गा पॉली क्लिनिक हॉस्पिटल का ताजा मामला भी इसी तरह की स्थिति को सामने लाता है.
जांच में फिर पकड़ा गया अवैध क्लिनिक
सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार के निर्देश पर मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मां दुर्गा हॉस्पिटल की जांच की. एसीएमओ डॉ. एसएन झा के नेतृत्व में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. मुकेश कुमार, स्वास्थ्यकर्मी अरुण कुमार मंडल और भास्कर झा टीम में शामिल थे.
जांच के बाद एसीएमओ ने बताया कि अस्पताल का निबंधन नहीं मिला. मौके पर कोई चिकित्सक या सर्जन भी मौजूद नहीं था. जांच टीम के अनुसार, वहां मौजूद एएनएम आशा कुमारी मरीजों का इलाज करने के साथ-साथ सर्जरी भी कर रही थीं.
एसीएमओ ने अपनी जांच रिपोर्ट में क्लिनिक को प्रथमदृष्टया फर्जी बताया है. यह जांच सहयोग पोर्टल पर मिली शिकायत के आधार पर की गयी.
पहले भी फर्जी घोषित, फिर भी संचालन जारी
मामले में सबसे अहम बात यह है कि कुछ दिन पहले हुई जांच में भी इसी क्लिनिक को फर्जी पाया गया था. इसके बावजूद संचालक के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
बार-बार गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद भी मामला जांच और नोटिस तक सीमित रहने से स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. बिना निबंधन स्वास्थ्य केंद्र का संचालन और चिकित्सक की अनुपस्थिति में इलाज व सर्जरी किए जाने का आरोप गंभीर है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे केंद्रों पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गयी तो किसी बड़ी घटना के बाद जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होगा.
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