Madhubani News : जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंडों में सैकड़ों अवैध पैथ लैब का हो रहा संचालन

स्वास्थ्य विभाग की गंभीरता का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि जिले में महज 100 पैथोलॉजी व डायग्नोस्टिक सेंटर का ही निबंधन किया गया है.

मधुबनी.

स्वास्थ्य विभाग की गंभीरता का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि जिले में महज 100 पैथोलॉजी व डायग्नोस्टिक सेंटर का ही निबंधन किया गया है, जबकि सैकड़ों की संख्या में पैथोलॉजी लैब व डायग्नोस्टिक सेंटर का संचालन हो रहा है. वह भी सरकार की ओर से तय मानक के प्रतिकूल. सरकार की ओर से निर्धारित प्रावधानों के अनुसार किसी भी पैथोलॉजी केंद्र के संचालन के लिए मूलभूत सुविधाओं का होना आवश्यक है. इसके लिए प्रत्येक जांच के लिए रेट चार्ट भी लगाने का निर्देश है, जबकि जिले के अधिकतर जांच केंद्रों पर रेट चार्ट नहीं लगाया गया है. इस कारण जैसा मरीज, वैसा शुल्क का फॉर्मूला अपनाया जा रहा है. एक ही जांच के लिए अलग-अलग मरीजों से अलग-अलग राशि की वसूली हो रही है. बिना रजिस्ट्रेशन के जांच घर चलाने पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि मुख्यालय सहित प्रखंडों में संचालित सैकड़ों जांच घर निबंधित नहीं है. जांच घरों का निबंधन नहीं होने की वजह से विभागीय स्तर पर इसकी सुनवाई करने वाला भी कोई नहीं है. प्रावधानों के अनुसार, बिना निबंधन के जांच घर संचालित करने पर पहली बार 50 हजार रुपये जुर्माना, दूसरी बार पकड़े जाने पर दो लाख रुपये तक जुर्माना व तीसरी बार पकड़े जाने पर पांच लाख रुपये जुर्माना लगाया जा सकता है.

पैथोलॉजी लैब संचालक के पास न योग्यता न रजिस्ट्रेशन

लैब संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से विधिवत नियम लागू किए गए हैं, लेकिन जिले में आश्चर्यजनक रूप से डीएमएलटी व उनके सहयोगी से लैब संचालित किया जा रहा है. इतना ही नहीं जांच रिपोर्ट पर साइन कर मरीजों को दे रहे हैं, जबकि लैब संचालक एमबीबीएस, एमडी पैथोलॉजिस्ट होना चाहिए. इतना ही नहीं अवैध तरीके से संचालित हो रहे लैब के पास न ही नियमानुसार पॉल्यूशन बोर्ड का रजिस्ट्रेशन है और न ही पंजीकृत मेडिकल वेस्ट फर्म का पंजीयन है.

पैथ लैब की नहीं हो रही जांच

जिले के सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को अपने अपने क्षेत्र में संचालित वैध व अवैध पैथोलॉजी लैब व डायग्नोस्टिक सेंटर की सूची सिविल सर्जन ने छह महीने पहले मांगी थी. लेकिन अभी तक महज कुछ एमओआइसी ने ही सिविल सर्जन कार्यालय को सूची उपलब्ध करायी है. इसके अलावे जांच भी सभी जगह नहीं हो पायी है. सबसे खराब स्थिति जिला मुख्यालय का है. जहां अभी तक एक भी पैथोलॉजी लैब की जांच नही हुई है.

अप्रशिक्षित करते हैं विभिन्न तरह की बीमारियों की जांचआम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए सरकार द्वारा भले ही लाख दावे किए जा रहे हों लेकिन हकीकत इसके विपरीत है. अधिकारियों की उदासीनता के कारण आज भी जिले में अधिकांश जांच घर बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित हैं. भूले से किसी जांच घरों का निबंधन है, भी तो जांच घरों में अप्रशिक्षित कर्मियों ही मरीजों का खून, पेशाब व अन्य जांच कर रहे हैं. रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर मरीजों को दवा लिखते हैं. रिपोर्ट गलत होने के कारण बीमारी का सही पता नहीं चलता है.

अवैध पैथोलॉजी लैब व डायग्नोस्टिक सेंटरों की होगी जांच

सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने कहा कि पैथ लैब की जांच के लिए धावा दल का गठन किया गया है. इसके अलावे सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित अवैध जांच घर, अल्ट्रासाउंड, क्लिनिक एवं नर्सिंग होम की जांच कर सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. अवैध रूप से संचालित पैथ लैब के संचालकों पर कार्रवाई होगी.

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Author: GAJENDRA KUMAR

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