बीमार बच्चे की दवा के लिए तड़प रहा था पंकज

मधुबनी : खररख गांव का छोटा सा महादलित बस्ती है. इस गांव की आबादी करीब 30 परिवारों की है. इसी गांव का पंकज पासवान और उसकी पत्नी सोमवार को बदहाल दिख रहे थे. कभी पत्नी उठकर लोगों के पास जाता तो पंकज बच्चे के पास बैठा रहता, कभी पंकज उठ जाता तो उसकी पत्नी अपने […]

मधुबनी : खररख गांव का छोटा सा महादलित बस्ती है. इस गांव की आबादी करीब 30 परिवारों की है. इसी गांव का पंकज पासवान और उसकी पत्नी सोमवार को बदहाल दिख रहे थे. कभी पत्नी उठकर लोगों के पास जाता तो पंकज बच्चे के पास बैठा रहता, कभी पंकज उठ जाता तो उसकी पत्नी अपने बच्चे को लाचार आखों से देखती.

आंख में बच्चे की तड़प की पीड़ा साफ झलक रही थी. दो बच्चा नीचे जमीन पर लेटा था. पंकज का दोनो बच्चा आठ साल का सोनू व तीन साल का मोनू बुखार से तप रहा था. बच्चों का यही बुखार पंकज पासवान व उसकी पत्नी की परेशानी का कारण बन गया था. पंकज पासवान बताता है कि रविवार की देर रात अचानक ही गांव में बाढ का पानी प्रवेश कर गया. पूरा गांव रात से ही घर खाली करने लगा है. बच्चा तीन दिनों से बुखार से पीड़ित है.

बाढ आ जाने के बाद पानी में भींगने से तबीयत और अधिक खराब हो गया है. दवा भी नहीं मिल रहा है. दुकानदार भी दुकान बंद किये हुए है. पेट में बच्चे को दाना भी नहीं मिल रहा है. जिससे हाल बुरा होता जा रहा है. रह रह कर आने वाले वाहन के रुकते ही इसे लगता कि किसी अधिकारी का गाड़ी है. बच्चे की बीमारी बताने दौड़ता. बाद में बच्चों की इस परेशानी से प्रभात खबर द्वारा जिलाधिकारी को अवगत कराया गया और बच्चे को दवा उपलब्ध करायी गयी.

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