प्रभार के बोझ तले दबा गम्हरिया प्रखंड, विकास कार्यों की रफ्तार हुई धीमी

प्रभार के बोझ तले दबा गम्हरिया प्रखंड, विकास कार्यों की रफ्तार हुई धीमी

By Kumar Ashish | January 15, 2026 6:19 PM

एक साथ कई प्रखंडों की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी, कार्यालयों से नदारद रहने के कारण ग्रामीण परेशान

गम्हरिया. प्रखंड मुख्यालय में पदस्थापित स्थायी पदाधिकारियों एवं कर्मियों की वर्तमान स्थिति कार्य निष्पादन में बड़ी बाधा बन रही है. विभागीय व्यवस्था के तहत प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों की नियुक्ति योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए की गयी है, लेकिन वर्तमान में एक ही अधिकारी के पास कई प्रखंडों का प्रभार होने से स्थिति विकट हो गयी है. इसका सीधा असर विकास योजनाओं की गति और गुणवत्ता पर पड़ रहा है.

प्रमुख विभागों में कामकाज प्रभावित

प्रखंड कार्यालय के साथ-साथ मनरेगा, स्वच्छता विभाग, बाल विकास परियोजना (आइसीडीएस) तथा पंचायती राज विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभागों में पदस्थापित अधिकारी एक ही समय में कई अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं. इस कारण वे किसी भी एक प्रखंड को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं. समय और संसाधनों के अभाव में योजनाओं का क्रियान्वयन न केवल धीमा हो गया है, बल्कि समय पर लक्ष्य पूरा करना भी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है.

अनुपस्थिति से निर्णय प्रक्रिया बाधित

अधिकारियों की व्यस्तता का आलम यह है कि वे मुख्य कार्यालयों में नियमित रूप से उपस्थित नहीं हो पा रहे हैं. कई बार प्रभार के कार्यों का हवाला देकर अधिकारी मुख्यालय से कन्नी काटते नजर आते हैं. इससे न केवल फाइलों का अंबार लग रहा है, बल्कि महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लेने की प्रक्रिया भी पूरी तरह बाधित हो गयी है. ग्रामीणों को अपने छोटे-छोटे कार्यों के लिए कई दिनों तक प्रखंड कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं.

सुधार के लिए ठोस तंत्र की दरकार

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जानकारों का मानना है कि यदि अधिकारी केवल एक प्रखंड पर ध्यान केंद्रित करें, तो पारदर्शिता व कार्यक्षमता में व्यापक सुधार संभव है. इसके लिए एक अधिकारी को केवल एक प्रखंड की जिम्मेदारी सौंपी जाए. उपस्थिति और कार्य निष्पादन की नियमित मॉनिटरिंग के लिए डिजिटल या भौतिक तंत्र विकसित हो. जिला स्तर से समय-समय पर कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता की जांच की जाए.अगर प्रशासन इस दिशा में ठोस कदम उठाता है, तो न केवल विभागीय कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम पायदान पर खड़े ग्रामीण समुदाय तक सही समय पर पहुंच सकेगा.

“पदाधिकारियों का प्रभार सीमित कर उन्हें केवल एक ही प्रखंड की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए. जब तक कार्य की नियमित निगरानी और समीक्षा नहीं होगी, तब तक लापरवाही पर लगाम लगाना मुश्किल है. कर्मियों के लिए प्रशिक्षण भी अनिवार्य है. ” —

शशि कुमार,

प्रमुख

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