ग्रामीण क्षेत्रों में डोरा पर्व संपन्न

पूजा के दौरान गले में सूत का डोरा धारण किया जाता है और कथा श्रद्धा से सुनी जाती है

ग्वालपाडा, मधेपुरा.

ग्वालपाड़ा के ग्रामीण क्षेत्रों में मनाए जाने वाले इस लोक आस्था के पर्व का रविवार को संपन्न हुआ. इस पर्व का आयोजन मुख्य रूप से घर-परिवार की समृद्धि, पति-पत्नी एवं पुत्र के दीर्घायु के लिए किया जाता है. पर्व के अंतिम रविवार को महिलाएं श्रद्धापूर्वक गाय के बथान पर पूजा अर्चना करती हैं और माता सप्ता-विप्ता की कथा सुनती हैं. इस दौरान महिलाएं व्रत रखकर पूरे नियम और श्रद्धा से पूजा करती हैं. उन्होंने बताया कि यह पर्व चैत्र मास के कृष्ण पक्ष के तिथि से शुरू होकर वैसाख मास के शुक्ल पक्ष के अंतिम रविवार तक चलता है. प्रत्येक रविवार को व्रती महिलाएं गाय के बथान में कलश स्थापित कर माता सप्ता और विप्ता की पूजा करती हैं, जिसमें मिठाई, फल और पकवान का भोग लगाया जाता है. पूजा के दौरान गले में सूत का डोरा धारण किया जाता है और कथा श्रद्धा से सुनी जाती है. छह माह तक, जब तक यह पर्व चलता है, महिलाएं और पुरुष नमक का सेवन नहीं करते. आज डोरा पर्व के समापन के साथ ही वे नमक खाना प्रारंभ कर देते हैं. यह पर्व न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह समुदाय में एकता और श्रद्धा का प्रतीक भी है.

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By Kumar ashish

कुमार आशीष 15 वर्षों से प्रभात खबर समूह के साथ पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से जनसंचार में डिग्री प्राप्त करने के बाद इन्होंने राजनीति, अपराध और कोसी अंचल की रिपोर्टिंग में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पिछले पांच वर्षों से सक्रिय हैं. पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए इन्हें नेपाल में 'अंतरराष्ट्रीय मैथिली युवा पत्रकारिता सम्मान' से नवाजा जा चुका है.

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