Iran War MBS Trump Talks: ईरान के ऊपर अमेरिका और इजरायल की ओर से 28 फरवरी 2026 से लगातार हमले हो रहे हैं. इस संघर्ष को छिड़े हुए अब 15 दिन से भी ज्यादा बीत चुके हैं, लेकिन तनाव कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है. युद्ध का अंत होना दूर की बात, कई अरब देश और उनका लीडर चाह रहा है कि ईरान को और मारा जाए. कौन है लीडर? सऊदी अरब. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने कथित तौर डोनाल्ड ट्रंप ने निजी बातचीत में मांग की है कि ईरान पर हमले जारी रखे जाएं.
NYT की एक रिपोर्ट के अनुसार, क्राउन प्रिंस ने कहा कि जैसे-जैसे युद्ध तेज हो रहा है, अमेरिका को ‘ईरान पर जोरदार प्रहार जारी रखना चाहिए.’ रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि संघर्ष के दौरान सऊदी नेता लगातार ट्रंप के संपर्क में रहे हैं. अखबार के मुताबिक, व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से ट्रंप कई अरब नेताओं से नियमित बातचीत कर रहे हैं. इन नेताओं में सबसे कड़ा रुख मोहम्मद बिन सलमान सबसे ज्यादा सख्त रुख अपनाने वालों में शामिल हैं.
ईरान पर सख्त रुख के पक्ष में सऊदी अरब
सऊदी अरब लंबे समय से ईरान को अपना सबसे बड़ा क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी मानता रहा है. मिडिल ईस्ट में राजनीतिक प्रभाव, सैन्य शक्ति और सांप्रदायिक विभाजन को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बना रहता है. हालांकि, दोनों देश प्रत्यक्ष रूप से आज तक (इस्लाम की पैदाइश के बाद) कभी नहीं भिड़े. लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से (यमन, सीरिया, इराक और लेबनान में) दोनों के बीच कई बार गुत्थम-गुत्थी हुई है.
सऊदी अरब का यह हाल का रुख उसकी लंबे समय से चली आ रही नीति का ही एक्सटेंशन है. NYT रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दिवंगत सऊदी किंग किंग अब्दुल्लाह भी पहले अमेरिका से ईरान के खिलाफ कड़ा कदम उठाने की अपील करते रहे थे. एक बार तो उन्होंने ईरान के लिए ‘सांप का सिर काटने’ जैसी बात भी कही थी.
तीसरे हफ्ते में पहुंचा युद्ध
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा यह संघर्ष अब तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है. इस दौरान ईरान के ऊपर जितने हमले हुए हैं, उसने इसका बदला मिडल ईस्ट के देशों पर ही निकाला है. ईरान ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात दोनों के तेल ढांचों पर ड्रोन और मिसाइल अटैक किए हैं. सऊदी अरब के अरामको की फैसेलिटीज जैसे रास तनुरा में तो यूएई में फुजैराह पोर्ट के ऑयल डिपो पर अटैक किया. इन हमलों की वजह से व्यापक स्तर पर युद्ध फैलने की आशंका बढ़ गई है.
ये हमले तेहरान के पास ईरानी तेल भंडारण सुविधाओं पर इज़राइली हमलों के बाद हुए हैं. जहां कमजोर होता ईरान सऊदी अरब के रणनीतिक हितों के अनुरूप हो सकता है, वहीं यह युद्ध सऊदी अरब और उसके पड़ोसी देशों के लिए सुरक्षा जोखिम भी बढ़ा रहा है. घटनाओं से साफ है कि रियाद एक जटिल स्थिति में फंसा हुआ है एक तरफ ईरान पर दबाव बनाना उसके दीर्घकालिक रणनीतिक लक्ष्य से मेल खाता है, वहीं दूसरी ओर बढ़ता संघर्ष खाड़ी देशों में फैलकर ऊर्जा ढांचे को खतरे में डाल सकता है.
तीसरे हफ्ते तक ईरान में हताहतों की संख्या लगातार बढ़ रही है और पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव गहराता जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 2,100 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें 13 अमेरिकी नागरिक भी शामिल हैं. इस युद्ध का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ा है. तेल की कीमतें बढ़कर लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं, क्योंकि सप्लाई बाधित होने की आशंका जताई जा रही है.
रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है. हालांकि, हमलों के बावजूद अमेरिका के कुछ प्रमुख लक्ष्य अभी भी पूरे नहीं हुए हैं. ईरान का समृद्ध यूरेनियम भंडार अभी भी देश के भीतर है, और तेहरान के नेतृत्व ने हमलों का विरोध जारी रखने का संकल्प जताया है.
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युद्ध को लेकर ट्रंप का असमंजस और ईरान का जवाब
इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध की अवधि को लेकर अलग-अलग संकेत दिए हैं. कभी उन्होंने कहा कि संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है, तो कभी इशारा किया कि यह लंबा चल सकता है. वहीं ईरान ने भी हर बार इस तरह की टिप्पणियों का बड़ी ही बेबाकी से जवाब दिए हैं. उसका कहना है कि वह न तो बातचीत कर रहा है और न ही सरेंडर करेगा. जब तक निर्णायक फैसला नहीं हो जाता वह लड़ेगा.
