क्या अमेरिका ने सचमुच ईरान की मिसाइल ताकत को ध्वस्त कर दिया है? जानिए सच…

israel iran war news latest : ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के 18वें दिन भी युद्ध समाप्ति की कोई घोषणा या उम्मीद नजर नहीं आ रही है. वहीं अमेरिका यह दावा कर रहा है कि उसने और इजरायल ने मिलकर ईरान की मिसाइल ताकत को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है और अब ईरान सरेंडर कर देगा. अमेरिका के इस दावे में दम नजर भी आता है, लेकिन फिर यह सवाल मन में उठता है कि अगर ईरान की मिसाइल ताकत ध्वस्त हो गई है, तो फिर वह हमला कैसे कर रहा है? ईरान सिर्फ हमले नहीं कर रहा, वह उन देशों को भी सबक सिखा रहा है, जिसपर उसे अमेरिका का साथी होने की आशंका है.

Israel Iran war news latest : अमेरिका यह दावा कर रहा है कि उसने ईरान के मिसाइल सिस्टम को नेस्तनाबूद कर दिया है, बावजूद इसके ईरान रणनीतिक तरीके से हमले कर रहा है. उसने होर्मुज स्ट्रेट को निशाना बनाया है, ताकि अमेरिका पर दबाव बने और उसे सरेंडर ना करना पड़े. अमेरिकी हमले से ईरान बौखलाया नहीं है, बल्कि वह लगातार ऐसी रणनीति बना रहा है, ताकि वह खुद सरेंडर करने के बजाय अमेरिका पर दबाव बना सके. उसने अपनी घटती ताकत के बीच ड्रोन को अपना प्रमुख हथियार बना लिया है.

अमेरिकी दावे का क्या है सच?

अमेरिका यह कह रहा है कि उसने ईरान को तबाह कर दिया, लेकिन की ओर से हमले जारी हैं. हालांकि यह भी एक सच्चाई है कि युद्ध के शुरुआती दौर में ईरान ने सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे, वहीं अब उसी ओर से हमले गिनती में हो रहे हैं. अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन की रिपोर्ट के अनुसार ईरान की फायरिंग क्षमता में भारी गिरावट दर्ज की गई. रिपोर्ट के अनुसार ईरान अब सिंगल डिजिट में हमले कर रहा है, जबकि शुरुआती दौर में वह सैकड़ों की संख्या में हमले कर रहा था.पेंटागन के अनुसार मिसाइल से किए जा रहे हमलों में करीब 90% और ड्रोन से किए जा रहे हमलों में 80% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है. इससे यह स्पष्ट होता है कि अमेरिकी दावे में सच्चाई है और अमेरिका और इजरायल ने ईरान को बुरी तरह से नुकसान पहुंचाया है. बावजूद इसके अभी यह कहना सही नहीं होगा कि ईरान को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है, क्योंकि वह अभी हमले कर रहा है.

क्या ईरान युद्ध को नयी दिशा देगा?

ईरान की नयी रणनीति

अमेरिका और इजरायल के ताबड़तोड़ हमले के बावजूद ईरान ने अबतक सरेंडर नहीं किया है और ना ही शांति की कोई पेशकश की है. ऐसे में यह समझना भी जरूरी है कि आखिर इस युद्ध का भविष्य क्या होने वाला है.ईरान अब यह समझ चुका है कि उसकी ताकत कम हो गई है, लेकिन अपनी रणनीति में परिवर्तन करके वह अमेरिका सहित उसके मित्र राष्ट्रों को यह बताना चाहता है कि उन्होंने ईरान से पंगा लेकर गलती कर दी है. ईरान कम हमले कर रहा है, लेकिन वह युद्ध की समाप्ति की घोषणा भी नहीं कर रहा है और बीच–बीच में फायरिंग कर रहा है, जिसकी वजह से अमेरिका आश्वस्त होकर नहीं बैठ पा रहा है. इतना ही नहीं ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को निशाना बनाया है. वह वहां से जाने वाले जहाजों को टारगेट कर रहा है, ताकि विश्व में तेल का संकट पैदा हो और अमेरिका पर दबाव बने. ईरान दुश्मन को आराम नहीं करने देने की रणनीति पर काम कर रहा है, वह मनोवैज्ञानिक और आर्थिक दबाव बनाकर युद्ध को दूसरी दिशा दे रहा है.

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युद्ध को लंबा खिंचना चाहता है ईरान?

ईरान इस फिराक में है कि युद्ध को लंबा खिंचा जाए, ताकि दुश्मन का डिफेंस सिस्टम थक जाए. उसके जो मिसाइल लाॅन्चर हैं, उनके जरिए वह छोटे–छोटे हमले करते रहे. इस युद्ध में ईरान ने ड्रोन को अपना अचूक हथियार बना लिया है.शाहिद 136 ( Shahed 136) ड्रोन की मदद से ईरान अपने हमलों को मारक बना रहा है.यह सस्ता होता है और इसे बनाना आसान है. साथ ही इसे लॉन्च करने के लिए जटिल इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं होती है.  ईरान ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. ईरान स्थायी बेस की जगह मोबाइल लॉन्चर यानी ट्रकों या छिपे प्लेटफॉर्म से मिसाइल दाग रहा है. इनकी मदद से छोटे हमले किए जा सकते हैं. यही वजह है कि कम संसाधनों के बावजूद ईरान हमले जारी रखे हुए है.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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