विश्व हिंदी दिवस पर परिचर्चा आयोजित

विश्व में हिंदी का विकास करने एवं इसे प्रचारित-प्रसारित करने के उद्देश्य से विश्व हिंदी सम्मेलनों की शुरुआत की गई

By Kumar Ashish | January 11, 2026 7:08 PM

मधेपुरा. राष्ट्रीय सेवा योजना बीएनएमयू के तत्वावधान में ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय में विश्व हिंदी दिवस पर परिचर्चा का आयोजन किया गया. इसका विषय वैश्विक परिदृश्य में हिंदी था. विषय प्रवेश पीजी सेंटर सहरसा में वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो सिद्धेश्वर काश्यप ने बताया कि विश्व हिंदी दिवस प्रति वर्ष दस जनवरी को मनाया जाता है. इसका उद्देश्य विश्व में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए जागरूकता पैदा करना तथा हिंदी को अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में स्थापित करना है. उन्होंने बताया कि विश्व में हिंदी का विकास करने एवं इसे प्रचारित-प्रसारित करने के उद्देश्य से विश्व हिंदी सम्मेलनों की शुरुआत की गई और प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन 10 जनवरी, 1975 को नागपुर में आयोजित हुआ था. इसी कारण इस दिवस को ””विश्व हिंदी दिवस”” के रूप में मनाया जाता है. इस अवसर पर मुख्य वक्ता रमेश झा महिला महाविद्यालय, सहरसा की पूर्व प्रधानाचार्य डॉ रेणु सिंह ने कहा कि हिंदी मात्र भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व को जोड़ने वाली भाषा बन रही है. आज सौ से अधिक देशों के 670 विश्वविद्यालयों, शिक्षण संस्थाओं और विद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है. मुख्य अतिथि अभाविप के विभाग प्रमुख प्रो ललन प्रसाद अद्री ने कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है. इसके माध्यम से ही हमारे राष्ट्र का विकास संभव है. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रधानाचार्य प्रो. कैलाश प्रसाद यादव ने कहा कि आज हिंदी ने विश्व में अपनी एक विशिष्ट पहचान बना ली है. अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी में बोलना शर्म नहीं, बल्कि गर्व की बात है. संचालन करते हुए असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ जैनेन्द्र कुमार ने कहा कि हिंदी देश की साझी विरासत की वाहक है. इसके विकास में सभी वर्गों के लोगों ने अपना योगदान दिया है. धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कार्यक्रम समन्वयक डॉ सुधांशु शेखर ने कहा कि हिंदी को केवल सृजनात्मक लेखन तक सीमित नहीं किया जा सकता है. विज्ञान, शिक्षा, मनोविज्ञान एवं दर्शन सहित ज्ञान के सभी क्षेत्रों में हिंदी के महत्व को स्थापित करने की जरूरत है. इस अवसर पर सीनेटर डॉ रंजन कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गौरव कुमार चौधरी, बीसीए विभागाध्यक्ष के. के. भारती, डॉ. सौरभ कुमार चौहान, सौरभ यादव, बाबू साहब, विवेक, सरजीत, आयुष, राजू, प्रशांत, रॉबिन्स, मुस्कान, निकिता, स्वाति आदि उपस्थित थे.

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