हाइवा में लगे लोहे के ग्रिल बने मौत का कारण

हाइवा में लगे लोहे के ग्रिल बने मौत का कारण

By Kumar Ashish |

परिवहन विभाग की उदासीनता पर उठे सवाल

मधेपुरा.

सड़कों पर दौड़ते भारी वाहनों के आगे एसेसरीज के नाम पर लगाये जा रहे लोहे के ग्रिल व कठोर ढांचे आमलोगों की जान के दुश्मन बनते जा रहे हैं. शनिवार की अहले सुबह मधेपुरा में हाइवा व कार की टक्कर ने इस खतरनाक चलन की भयावह सच्चाई उजागर कर दी. हादसे में कार सवार चार युवकों की मौके पर ही मौत हो गयी. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया.

लोहे का ग्रिल बना जानलेवा

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हाइवा के आगे लोहे का ग्रिल व अतिरिक्त कठोर संरचना लगी हुई थी. तेज रफ्तार में हुई टक्कर के दौरान यही ग्रिल कार सवार के लिए जानलेवा साबित हुआ. कार का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया. यदि भारी वाहन के आगे इस तरह का लोहे का ढांचा नहीं लगा होता, तो संभव है कि जान-माल का नुकसान इतना भयावह नहीं होता.

कानून में साफ मनाही फिर भी धड़ल्ले से उल्लंघ

मोटर वाहन अधिनियम और केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में स्पष्ट प्रावधान है कि किसी भी वाहन के आगे या पीछे ऐसे एसेसरीज नहीं लगाये जा सकते जो वाहन की मूल बनावट से अलग हों और दुर्घटना की स्थिति में अतिरिक्त खतरा पैदा करें. इसके बावजूद ट्रक, हाइवा, पिकअप और कई निजी वाहनों में खुलेआम बुल बार, आयरन ग्रिल, लोहे के पाइप और अन्य कठोर ढांचे लगाये जा रहे हैं.

सुरक्षा के नाम पर खतरे का सौदा

सड़क सुरक्षा से जुड़े जानकारों का कहना है कि भारी वाहन मालिक इन्हें सुरक्षा के नाम पर लगवाते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि आमने सामने की टक्कर में यही एसेसरीज छोटी गाड़ियों के लिए मौत का कारण बनती है. टक्कर के समय जहां वाहन का अगला हिस्सा ऊर्जा अवशोषित कर नुकसान को कम कर सकता है. वहीं लोहे का ग्रिल सीधा प्रहार करता है और क्षति कई गुना बढ़ जाती है.

परिवहन विभाग की भूमिका सवालों के घेरे में

इस पूरे मामले में परिवहन विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है. नियमों के बावजूद अवैध एसेसरीज लगे वाहनों पर न तो नियमित जांच हो रही है और न ही कार्रवाई. कभी कभार अभियान जरूर चलाये जाते हैं, लेकिन वह भी औपचारिकता बनकर रह जाते हैं. नतीजतन वाहन मालिक बेखौफ होकर नियमों की अनदेखी कर रहे हैं.

नियमों से आंख मूंदे जिम्मेदार अधिकारी

स्थानीय लोगों का आरोप है कि आरटीओ व परिवहन विभाग की टीमें रोजाना इन्हीं सड़कों से गुजरती हैं, लेकिन अवैध एसेसरीज लगे वाहन उनकी नजर से बच जाते हैं. दुर्घटना के बाद ही नियमों की याद आती है. तब तक कई परिवार अपनों को खो चुके होते हैं.

चार घरों में पसरा मातम

हादसे में जान गंवाने वाले चारों युवक एक ही कार में सवार थे और सुबह के समय किसी आवश्यक कार्य से निकले थे. हादसे की खबर मिलते ही उनके घरों में कोहराम मच गया. पूरे इलाके में मातम पसरा है. परिजन बदहवास हैं और प्रशासन से जवाब की मांग कर रहे हैं.

कार्रवाई की उठी मांग

सामाजिक संगठनों व जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि अवैध एसेसरीज लगे सभी वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया जाय. भारी जुर्माना लगाया जाय. वाहनों की जब्ती व परमिट निरस्तीकरण जैसे कड़े कदम उठाये जाय. ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके. मधेपुरा की यह घटना महज एक सड़क दुर्घटना नहीं बल्कि नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम है. जब तक परिवहन विभाग सख्ती से कानून लागू नहीं करेगा, तब तक सड़कों पर लोहे के ग्रिल मौत का कारण बनते रहेंगे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Kumar Ashish

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