पांच साल से फरार चल रहा था कुख्यात नक्सनी अनिल कोड़ा

पांच साल से फरार चल रहा था कुख्यात नक्सनी अनिल कोड़ा

सूर्यगढ़ा/कजरा. नक्सल विरोधी अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है. वर्ष 2021 के चर्चित गिद्धेश्वर जंगल कांड में नामजद व पांच साल से फरार चल रहे कुख्यात नक्सली अनिल कोड़ा उर्फ अनिल मास्टर को एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया है. कार्रवाई लखीसराय जिले के कजरा थाना क्षेत्र के शीतता कोड़ासी गांव में की गई, जहां संयुक्त रूप से एसटीएफ, एसएसबी, कजरा व पीरीबाजार थाना पुलिस ने छापेमारी की. गिरफ्तार नक्सली अनिल मास्टर, कार्तिक सोरेन उर्फ कार्तिक कोड़ा का पुत्र है. लंबे समय से पुलिस की निगरानी में था. उसे पहले कजरा थाना लाया गया, जहां यह जानकारी सामने आयी कि वह कजरा थाना कांड संख्या 79/21 में पहले ही जमानत पर है, लेकिन जमुई जिले के खैरा थाना कांड संख्या 203/21 में अब भी फरार था. कजरा थानाध्यक्ष राजवर्धन प्रसाद ने बताया कि अनिल कोड़ा को खैरा थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया है, क्योंकि वह वहां दर्ज नक्सल कांड में वांछित है. घटना की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो 27 जून 2021 को पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि गिद्धेश्वर जंगल में नक्सलियों का एक दस्ता छिपा हुआ है. सूचना मिलते ही अर्धसैनिक बल और पुलिस की संयुक्त टीम ने जंगल में घेराबंदी की, लेकिन नक्सलियों को इसकी भनक लग गयी व मुठभेड़ शुरू हो गयी. इसके बाद नक्सली अपना ठिकाना बदलते रहे. तलाशी अभियान के दौरान पुलिस को जंगल से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री व अन्य नक्सली सामान बरामद हुआ था. इस मामले में अनिल कुमार को नामजद किया गया था, जो घटना के बाद से फरार था. कजरा थाना में अनिल कोड़ा पर दो अन्य मामले, कांड संख्या 33/10 व 79/21 दर्ज हैं. 79/21 में परिजनों द्वारा रिकॉल दिखाया गया था, जिससे वह मामले में जमानत पर था. लेकिन खैरा थाना में दर्ज गंभीर नक्सली कांड में उसकी फरारी के चलते उसे खैरा पुलिस को सौंपा गया. इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व जमालपुर एसटीएफ के डीएसपी सुनील कुमार ने किया. एसटीएफ व एसएसबी की टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से यह रणनीतिक छापेमारी की, जिससे वर्षों से फरार चल रहे नक्सली को गिरफ्तार करना संभव हो सका. पुलिस अब गिरफ्तार नक्सली से पूछताछ कर रही है, ताकि उसके नेटवर्क, ठिकानों और अन्य सहयोगियों के बारे में जानकारी मिल सके. संभावना जताई जा रही है कि इस गिरफ्तारी से इलाके में सक्रिय अन्य नक्सलियों तक पहुंचने में भी मदद मिलेगी.

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