गंगासराय में नाट्य परंपरा को संजोए हुए है श्री दुर्गा नाट्य कला परिषद

गंगासराय में स्थित श्री दुर्गा नाट्य कला परिषद लंबे समय से नाट्य परंपरा को जीवित रखने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है. परिषद की पहचान केवल पूजा-पर्वों पर होने वाले आयोजनों से ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने से भी जुड़ी हुई है.

बड़हिया. प्रखंड के गंगासराय में स्थित श्री दुर्गा नाट्य कला परिषद लंबे समय से नाट्य परंपरा को जीवित रखने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है. परिषद की पहचान केवल पूजा-पर्वों पर होने वाले आयोजनों से ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने से भी जुड़ी हुई है. परिषद के सचिव राजेश कुमार सिंह मंटू ने बताया कि संस्था हर वर्ष दुर्गा पूजा, सरस्वती पूजा, काली पूजा और छठ पूजा जैसे अवसरों पर अलग-अलग विधाओं के नाटक प्रस्तुत करती है. यह परंपरा कई पीढ़ियों से चलती आ रही है, जिसके माध्यम से समाज में नैतिक मूल्यों और देशभक्ति की भावना को जीवित रखा जाता है. इस वर्ष भी दुर्गा पूजा महोत्सव के दौरान परिषद ने चार नाटकों का मंचन करने की योजना बनायी थी. निर्देशक धीरेंद्र कुमार वर्मा के निर्देशन में 29 सितंबर को सामाजिक नाटक “सौतेली मां” और 30 सितंबर को धार्मिक नाटक “अभागा कर्ण” का मंचन किया गया, जबकि दो अक्तूबर को विजयादशमी के अवसर पर देशभक्ति पर आधारित नाटक “आतंकवाद को मिटा दो उर्फ कश्मीर हमारा है” ने दर्शकों का दिल जीत लिया. हालांकि एक अक्तूबर को वर्षा बाधा बनी और इस कारण “मेवाड़ का सिंहासन” नाटक मंचित नहीं हो सका. नाट्य कला परिषद का मानना है कि रंगमंच केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और सामाजिक चेतना का आईना है. परिषद के प्रयासों से स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है और दर्शक भी पुराने नाटकों की विधा से जुड़ते हैं. नाट्य महोत्सव में इस बार भी भारी भीड़ उमड़ी और कलाकारों के अभिनय को सराहा गया. बड़हिया में ब्रह्माकुमारी विश्वविद्यालय ने आयोजित की भव्य नवरात्र झांकी बड़हिया. शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर नगर के श्रीधर सेवा आश्रम में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा दो दिवसीय भव्य चैतन्य देवियों की झांकी का आयोजन किया गया. इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी केंद्र की प्रभारी बीके रौशनी ने दुर्गा पूजा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ””दुर्गा”” का अर्थ है “दुर्गुणों को हरने वाली. ” उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को बताया कि नवरात्रि के दौरान उपवास, रास और गरबा करने से तन-मन का शुद्धिकरण होता है और आत्म-जागृति का अनुभव होता है. बीके रौशनी ने कन्या पूजन के महत्व पर भी जोर देते हुए कहा कि यह केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज की सभी कन्याओं का सम्मान करने और उन्हें देवी के रूप में देखने का संदेश देता है. इस आयोजन का शुभारंभ बीडीओ प्रतीक कुमार ने मां दुर्गा की आरती उतारकर किया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और झांकी का आनंद लिया. उपस्थित लोगों ने आयोजन को सफल और सामूहिक भक्ति भावना से परिपूर्ण बताया. आयोजकों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम न केवल आध्यात्मिक चेतना बढ़ाते हैं, बल्कि सामाजिक सद्भाव और सामूहिक श्रद्धा का भी संवर्धन करते हैं. ——————————————————————————

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