किशनगंज. स्वास्थ्य के क्षेत्र में जागरूकता और सामूहिक प्रयास का परिणाम किसी भी समाज की समृद्धि का आधार उसके लोगों का स्वास्थ्य होता है. संक्रामक रोगों में टीबी लंबे समय से एक गंभीर चुनौती रही है, लेकिन सरकार की प्रतिबद्धता, स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता और आमजन की जागरूकता से अब यह चुनौती धीरे-धीरे नियंत्रण में आ रही है. विश्व टीबी दिवस के अवसर पर किशनगंज जिले ने इस दिशा में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए सात पंचायतों को ‘टीबी मुक्त पंचायत’ घोषित किया है. यह न केवल जिले के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह दर्शाता है कि निरंतर प्रयास और समन्वित रणनीति से असंभव लक्ष्य भी संभव बनाए जा सकते हैं.विश्व टीबी दिवस के अवसर पर जिला यक्ष्मा केंद्र, किशनगंज में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस अवसर पर जिला पदाधिकारी, विधायक को कोचाधामन, जिला परिषद अध्यक्ष, रेड क्रॉस सोसाइटी के आभाष कुमार साहा एवं अन्य वरीय अधिकारियों की उपस्थिति रही. कार्यक्रम के दौरान टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत ‘100 डेज कैंपेन’ का शुभारंभ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के लाइव प्रसारण के माध्यम से किया गया. जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी डॉ मंजर आलम ने बताया कि अभियान का उद्देश्य अगले 100 दिनों में अधिक से अधिक संभावित टीबी मरीजों की पहचान, उनकी जांच और उपचार सुनिश्चित करना है. स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए विशेष रणनीति तैयार की है, जिसमें घर-घर स्क्रीनिंग, सघन जांच और सामुदायिक स्तर पर जागरूकता गतिविधियों को शामिल किया गया है.
जिले के सात पंचायतों को मिला ‘टीबी मुक्त’ का दर्जा
कार्यक्रम के दौरान जिला पदाधिकारी के हाथों जिले के सात पंचायतों को ‘टीबी मुक्त पंचायत’ घोषित किया गया. इनमें पोठिया प्रखंड के कोलथा, ठाकुरगंज प्रखंड के पटेशरी एवं तातपौवा, दिघलबैंक प्रखंड के धनगरा, कोचाधामन प्रखंड के डेरामारी, टेढ़ागाछ प्रखंड के बेगना तथा किशनगंज प्रखंड के हालामाला पंचायत शामिल हैं.इन पंचायतों में पिछले एक वर्ष के दौरान टीबी के नए मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है तथा सभी चिन्हित मरीजों का सफलतापूर्वक उपचार पूरा कराया गया है.जनभागीदारी से ही संभव है टीबी उन्मूलन
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला पदाधिकारी ने कहा कि टीबी मुक्त पंचायत की यह उपलब्धि स्वास्थ्य विभाग, जनप्रतिनिधियों और आम जनता के सामूहिक प्रयास का परिणाम है. यह सिर्फ एक सम्मान नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है कि हम इस स्थिति को बनाए रखें और अन्य पंचायतों को भी इस दिशा में प्रेरित करें.उन्होंने आगे कहा कि “टीबी पूरी तरह से इलाज योग्य बीमारी है. यदि समय पर जांच और उपचार हो जाए, तो इसे जड़ से समाप्त किया जा सकता है. आम लोगों को चाहिए कि दो सप्ताह से अधिक खांसी, बुखार, वजन में कमी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच कराएं.स्वास्थ्य विभाग की रणनीति: स्क्रीनिंग, जांच व निरंतर फॉलो-अप
टीबी उन्मूलन के लिए जिले में बहुस्तरीय रणनीति अपनाई गयी है. आशा कार्यकर्ता, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, एसटीएस/एसटीएलएस व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की टीम द्वारा घर-घर जाकर संभावित मरीजों की पहचान की जा रही है. संदिग्ध मरीजों की तुरंत जांच कर उन्हें नि:शुल्क दवा उपलब्ध करायी जा रही है. साथ ही, मरीजों के नियमित फॉलो-अप से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि वे पूरा उपचार लें और बीच में दवा न छोड़ें.
निक्षय योजना : मरीजों को मिल रही पोषण सहायता
टीबी मरीजों को उपचार के दौरान पोषण सहायता के रूप में प्रति माह 1000 रुपये की राशि ‘निक्षय योजना’ के तहत सीधे उनके बैंक खाते में दी जा रही है. इससे मरीजों को आर्थिक सहयोग मिलता है और वे बेहतर पोषण के साथ अपना इलाज पूरा कर पाते हैं.इसके अलावा, जिले में टीबी की जांच और दवाएं पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बड़ी राहत मिल रही है.
