ठाकुरगंज के स्कूलों में चूल्हे पर लकड़ी से बन रहा मध्याह्न भोजन

सरकार की ओर से बच्चों को धुआं-मुक्त, स्वच्छ और सुरक्षित भोजन देने का दावा ठाकुरगंज में दम तोड़ता नजर आ रहा

ठाकुरगंज.

सरकार की ओर से बच्चों को धुआं-मुक्त, स्वच्छ और सुरक्षित भोजन देने का दावा ठाकुरगंज में दम तोड़ता नजर आ रहा. नगर पंचायत के वार्ड संख्या एक स्थित प्राथमिक विद्यालय लोधाबाड़ी में मंगलवार की सुबह जो तस्वीर सामने आयी, उसने व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी. विद्यालय परिसर में ईंट सजा कर बनाये गये अस्थायी चूल्हे में लकड़ी और उपले जलाये गये. उसी पर पतीली और कुकर चढ़ाकर बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन बनाया गया. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह कोई एक दिन की मजबूरी नहीं, बल्कि पिछले 10 दिनों से यही स्थिति बनी हुई है.

दर्जनों स्कूलों में गैस खत्म, हेड मास्टर परेशान

यह समस्या सिर्फ एक विद्यालय तक सीमित नहीं है. पूरे प्रखंड के दर्जनों सरकारी स्कूलों में रसोई गैस खत्म होने से मध्याह्न भोजन योजना प्रभावित हो रही है. हेडमास्टरों की हालत ऐसी हो गयी है कि वे कभी गैस एजेंसी के चक्कर काट रहे हैं, तो कभी लकड़ी विक्रेताओं से संपर्क कर किसी तरह भोजन बनवाने की जुगाड़ कर रहे हैं. शिक्षकों का कहना है कि गैस की नियमित आपूर्ति नहीं होने से बच्चों का भोजन बनाना रोज एक चुनौती बन गया है.

विभाग को नहीं है जमीनी हकीकत की जानकारी

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि प्रखंड या जिला स्तर के शिक्षा विभाग के पास यह तक स्पष्ट जानकारी नहीं है कि किन-किन विद्यालयों में चूल्हा जलाकर भोजन बनाया जा रहा है. यह स्थिति प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है. क्या विभागीय अधिकारी जमीनी हकीकत से पूरी तरह अनजान हैं या फिर जानकर भी अनदेखी की जा रही है.

बच्चों की सेहत पर मंडराता खतरा

लकड़ी और उपलों से निकलने वाला धुआं न सिर्फ भोजन को अस्वच्छ बनाता है, बल्कि बच्चों और रसोइयों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है. सरकार जहां स्वच्छ ईंधन (एलपीजी) के जरिए सुरक्षित भोजन सुनिश्चित करने की बात करती है. वहीं यहां बच्चे धुएं के बीच पका खाना खाने को मजबूर हैं.

योजना बनाम हकीकत

मध्याह्न भोजन योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक और सुरक्षित भोजन देना है, ताकि उनकी सेहत और शिक्षा दोनों बेहतर हो सके. लेकिन ठाकुरगंज की जमीनी स्थिति इस योजना की पोल खोल रही है. जहां गैस सिलिंडर के अभाव में स्कूल फिर से पुराने दौर के चूल्हों पर लौट आये हैं. वहीं ये सवाल उठने लगे हैं कि क्या स्कूलों को रसोई गैस आपूर्ति करने में गैस एजेंसी मनमानी कर रही है या आपूर्ति शृंखला में गड़बड़ी है या फिर प्रशासनिक उदासीनता इसका कारण है. इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है, लेकिन इसका खामियाजा सीधे छोटे-छोटे बच्चों को भुगतना पड़ रहा है.

तुरंत हस्तक्षेप की जरूरत

स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द सभी विद्यालयों में रसोई गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित और स्वच्छ भोजन मिल सके. अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह समस्या और भी गंभीर रूप ले सकती है.

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By AWADHESH KUMAR

AWADHESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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