ठाकुरगंज नपं : अधर में लटका एमआरएफ सेंटर का निर्माण, कूड़ा निस्तारण में परेशानी
एमआरएफ सेंटर बन जाने से शहर में कचरा प्रबंधन की क्षमता बढ़ेगी
By AWADHESH KUMAR | Updated at :
ठाकुरगंज. ठाकुरगंज नगर के कूड़ा निस्तारण कार्य के लिए बनने वाले एमआरएफ सेंटर (मेटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर) के निर्माण में स्थाई कार्यपालक पदाधिकारी की नियुक्ति नहीं होना बाधा बन रहा है. ठाकुरगंज नपं में स्थाई कार्यपालक की नियुक्ति नहीं होने के कारण नगर की एक बड़ी समस्या कूड़ा निस्तारण कार्य अधर में लटका है. इस मामले में ठाकुरगंज नपं के मुख्य पार्षद सिकंदर पटेल ने कहा कि प्रभारी कार्यपालक पदाधिकारी विकास के किसी कार्य में रुचि नहीं ले रही हैं. इससे छह महीने से नगर का विकास कार्य बाधित पड़ा है. इस मामले में प्रभारी कार्यपालक पदाधिकारी मनीषा कुमारी से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो पायी.
क्या है एमआरएफ
एमआरएफ सेंटर से शहर में कचरा प्रबंधन क्षमता, स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होगी. डेढ़ करोड़ की लागत से बनने वाली इस परियोजना का टेंडर तक नहीं हुआ है. बताते चलें कि एमआरएफ सेंटर का निर्माण वार्ड 3 के डंपिंग ग्राउंड में प्रस्तावित है, जहां 1 करोड़ 5 लाख की लागत से चहारदीवारी का निर्माण होगा. नगर पंचायत प्रशासन का मानना है कि एमआरएफ सेंटर बन जाने से शहर में कचरा प्रबंधन की क्षमता बढ़ेगी, सूखे कचरे के प्रसंस्करण की सुविधा मजबूत होगी. स्वच्छता व्यवस्था में व्यापक सुधार आयेगा. नगर पंचायत की बड़ी परियोजनाओं में शामिल मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर के निर्माण की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है.
नये कार्यपालक पदाधिकारी का इंतजार
मुख्य पार्षद सिकंदर पटेल कहते हैं कि एमआरएफ सेंटर का निर्माण डेढ़ करोड़ की लागत से टेंडर के जरिये होना है. वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी प्रभारी कार्यपालक पदाधिकारी के पद पर हैं, इसलिए ये कोई कार्य करने के इच्छुक नहीं दिखती. अब जब तक ठाकुरगंज में नया कार्यपालक पदाधिकारी प्रभार नहीं लेता तब तक इस मामले में निविदा जारी नहीं हो सकती है. उन्होंने कहा कि अब पता नहीं ठाकुरगंज के लोगों को इस मामले में अच्छी खबर कब मिलेगी.
दो एकड़ जमीन पर चेंगमारी में बनेगा प्लांट
मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर (एमआरएफ) करीब दो एकड़ जमीन पर बनेगा. यहां गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग कर प्रतिदिन 100 टन तक कचरे का निस्तारण किया जायेगा. इतना ही नहीं गीले कचरे से जैविक खाद भी तैयार होगा. इससे पर्यावरण को लाभ मिलेगा. बताते चलें कि नगर सरकार के द्वारा इस प्लांट को बैठाने के लिए स्थल चयन चेंगमारी में किया गया है. नगर की आबादी से काफी दूर यह स्थल चाय बागान के किनारे है. डंपिंग ग्राउंड तक जाने के लिए मार्ग भी बनाया जा चुका है.
क्यों है यह जरूरी
वर्तमान में ठाकुरगंज में प्रतिदिन सैकड़ों टन कचरा निकलता है. इसमें करीब 60 प्रतिशत गीला और 40 प्रतिशत सूखा कचरा होता है. अब तक प्रोसेसिंग प्लांट नहीं होने से पूरा भार डंपिंग ग्राउंड पर ही पड़ता है. एमआरएफ शुरू होने के बाद डंपिंग ग्राउंड पर दबाव कम होगा और कचरा प्रबंधन की समस्या काफी हद तक हल हो जायेगी.
क्या कहते हैं मुख्य पार्षद
मामले में नपं ठाकुरगंज के मुख्य पार्षद ने कहा कि ठाकुरगंज में स्थाई कार्यपालक पदाधिकारी नहीं होने से नगर निकाय पंगु बन चुका है. वर्तमान प्रभारी कार्यपालक पदाधिकारी की नगर के विकास में कोई रुचि नहीं है, अब नये कार्यपालक पदाधिकारी की पोस्टिंग के बाद ही रुके हुए सारे कार्य शुरू होंगे.