बिहार के इस जिले में खुदीराम बोस ने फूंका था स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल, पढ़िए उनकी साहसिक जीवनगाथा

Khudiram Bose Birthday: बिहार के मुजफ्फरपुर में खुदीराम बोस ने वर्ष 1908 में स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल फूंका था. यहां के सेशन जज किंग्सफोर्ड की गाड़ी पर उन्होंने बम से हमला किया था. जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था.

Khudiram Bose Birthday: आजादी की लड़ाई का इतिहास क्रांतिकारियों के त्याग व बलिदान की अनगिनत कहानियों से भरा हुआ है. क्रांतिकारियों की सूची में खुदीराम बोस का भी नाम शामिल है. वे शहादत के बाद इतने लोकप्रिय हुए कि देश के युवक एक खास किस्म की धोती पहनने लगे. जिसके किनारी पर ‘खुदीराम’ लिखा होता था. बता दें कि 11 अगस्त 1908 की अहले सुबह खुदीराम बोस शहीद हो गए थे.

9वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ स्वदेशी आंदोलन की आग में कूदे

खुदीराम बोस को आजादी हासिल करने कि ऐसी ललक थी कि 9वीं कक्षा के बाद ही उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और वे स्वदेशी आंदोलन की आग में कूद पड़े. उन्होंने सबसे पहले रिवॉल्यूशनरी पार्टी की सदस्यता ली. उसके बाद वंदेमातरम् लिखे पर्चे बांटने लगे. बता दें कि खुदीराम बोस ने ही वर्ष 1908 में मुजफ्फरपुर में स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल फूंका था.

1908 में अंग्रेज अधिकारियों पर किया था बम से हमला

खुदीराम बोस ने सन 1908 में बंगाल में दो अंग्रेज अधिकारी वाट्सन और पैम्फायल्ट फुलर पर बम से हमला किया था. लेकिन, इस हमले में उनकी मृत्यु नहीं हुई वे बच निकले. मुजफ्फरपुर के सेशन जज किंग्सफोर्ड ने बंगाल के कई देशभक्तों को कड़ी सजा दे दी थी. जिससे खुदीराम बहुत नाराज थे. उसके बाद उन्होंने अपने साथी प्रफुल्लचंद चाकी के साथ मिलकर किंग्सफोर्ड को सबक सिखाने का मन बनाया.

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मुजफ्फरपुर में सेशन जज की गाड़ी पर फेंका था बम

इसके बाद दोनों दोस्त (खुदीराम बोस और प्रफुल्लचंद) मुजफ्फरपुर आए. शहर के पुरानी धर्मशाला में रहने लगे और जज की नियमित रेकी करने लगे. इसके बाद मौका मिलते ही 30 अप्रैल 1908 को सेशन जज की गाड़ी पर दोनों ने बम फेंक दिया. लेकिन, उस गाड़ी में उस समय सेशन जज की जगह उसकी परिचित दो यूरोपीय महिलाएं कैनेडी व उसकी बेटी सवार थीं. हालांकि, उसके बाद अंग्रेज पुलिस ने उन्हें वैनी वर्तमान में पूसा रोड रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया.

उसके बाद खुदीराम बोस को मुजफ्फरपुर जेल में बंद कर दिया गया. उनको फांसी की सजा सुनाई गई. महज 19 साल की उम्र में अमर इंकलाबी खुदीराम बोस ने हिंदुस्तान की आजादी के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे को गले लगा लिया था.

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अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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