खुले नाले व गंदगी से बढ़ा मच्छरों का प्रकोप, बीमारी फैलने का खतरा

शाम ढलते ही मच्छरों की भनभनाहट और उनके डंक से लोग परेशान हो उठते हैं

गोगरी. जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, वैसे-वैसे मच्छरों का प्रकोप भी तेजी से बढ़ता जा रहा है. शाम ढलते ही मच्छरों की भनभनाहट और उनके डंक से लोग परेशान हो उठते हैं. शहर से लेकर गांव तक स्थिति चिंताजनक होती जा रही है. मच्छरों के कारण न केवल लोग, बल्कि मवेशी भी प्रभावित हो रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े आकार के मच्छर दुधारू पशुओं को काट रहे हैं, जिससे उनके शरीर में सूजन तक हो रही है. मच्छरों के काटने से दुधारू मवेशी रातभर पैर और पूंछ मारते रहते हैं, जिससे उनकी दूध उत्पादन क्षमता भी प्रभावित होती है. वहीं शहरी इलाकों में महीन मच्छर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को परेशान कर रहे हैं. शाम होते ही मच्छर घरों में भर जाते हैं और काटने से शरीर पर लाल चकत्ते पड़ रहे हैं. शहर में कई लोग मजबूरन मच्छरदानी का सहारा ले रहे हैं. हालांकि मधु कुमारी और चंद्रकांती कुमारी जैसी महिलाओं का कहना है कि खाना बनाने, बर्तन साफ करने और कपड़े धोने जैसे घरेलू कार्यों के दौरान मच्छरदानी या मच्छर भगाने वाली टिकिया का उपयोग संभव नहीं है. उनका कहना है कि टिकिया जलाने पर मच्छर बेहोश होकर खाने में गिरने का डर रहता है. विकास कुमार, बैंक कर्मी दिग्विजय कुमार, शिक्षक टिंकू कुमार और व्यवसायी इमरान समेत कई शहरवासियों का कहना है कि अधिकांश मोहल्लों की गलियां और नालियां संकरी हैं, जहां धूप, हवा, सफाई कर्मी या फॉगिंग मशीन ठीक से नहीं पहुंच पाती. कई घरों के आगे खुले स्थानों पर कूड़ा और गंदा पानी जमा रहता है, जो मच्छरों के पनपने का प्रमुख कारण बन रहा है. दिन में मच्छर इन्हीं स्थानों पर छिपे रहते हैं और शाम होते ही घरों में फैल जाते हैं. लोगों का आरोप है कि भवन निर्माण और नक्शा पास करने में सख्ती नहीं होने, खुले नालों और जलजमाव की समस्या के कारण शहर में मच्छरों की स्थिति विकराल होती जा रही है. यदि समय रहते प्रभावी सफाई और फॉगिंग अभियान नहीं चलाया गया, तो संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है.

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By RAJKISHORE SINGH

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