गंगा के बढ़ते जलस्तर पर डीएम ने की समीक्षा, प्रभावित इलाकों में नाव और सामुदायिक किचन की तैयारी

गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने कटिहार में चिंता बढ़ा दी है। जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। समीक्षा बैठक में नाव परिचालन, सामुदायिक किचन और चिकित्सा सुविधाओं पर जोर दिया गया।

कटिहार. गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं. शनिवार को जिला पदाधिकारी आशुतोष द्विवेदी की अध्यक्षता में समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी प्रभावित क्षेत्रों के अंचलाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक हुई. बैठक में प्रभावित इलाकों की स्थिति, नाव परिचालन, सामुदायिक किचन, चिकित्सा सुविधा, पशुचारा और राहत सामग्री की उपलब्धता की समीक्षा की गयी.

बरारी के दो इलाकों में जनजीवन प्रभावित, नाव का परिचालन शुरू

बरारी के अंचलाधिकारी ने बताया कि गंगा के जलस्तर में वृद्धि के कारण दक्षिण भंडारतल और मोहना चांदपुर में जनजीवन प्रभावित हुआ है. प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही के लिए नाव का परिचालन शुरू कर दिया गया है. संबंधित पंचायत के मुखिया के आवेदन के आधार पर प्रभावित लोगों के लिए जल्द सामुदायिक किचन शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली गयी है.

कुरसेला में करीब 15 नावें चलायी गयीं

कुरसेला प्रखंड के पूर्वी मुरादपुर समेत अन्य प्रभावित पंचायतों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है. प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही के लिए करीब 15 नावों का परिचालन शुरू किया गया है. प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों पर लगातार नजर रखी जा रही है.

मनिहारी की सात पंचायतें प्रभावित

मनिहारी के अंचलाधिकारी ने बताया कि प्रखंड की कुल सात पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हुई हैं. इनमें धुरियाही पंचायत सबसे अधिक प्रभावित है. प्रभावित लोगों की सुविधा के लिए नौ नावों का परिचालन शुरू किया गया है. सामुदायिक किचन शुरू करने की भी तैयारी है.

दिलारपुर पंचायत में भी बाढ़ का पानी पहुंचने की आशंका जतायी गयी है. दक्षिण काटकोष, बाघमारा, मनोहरपुर और कुमारीपुर समेत अन्य पंचायतों में पानी आवागमन के रास्तों तक पहुंच गया है. प्रशासन की ओर से आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं.

प्रभावित इलाकों में मेडिकल कैंप लगाने का निर्देश

डीएम ने सिविल सर्जन को निर्देश दिया कि सभी प्रभावित प्रखंडों के उप स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी अपने क्षेत्रों में मेडिकल कैंप लगाकर लोगों को आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराएं. बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए जरूरी दवाओं का पर्याप्त भंडारण आपदा प्रबंधन विभाग की एसओपी के अनुरूप सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया.

पशुओं के लिए चारा और दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने का आदेश

डीएम ने जिला पशुपालन पदाधिकारी को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं की सुरक्षा के लिए पर्याप्त मात्रा में पशुचारा उपलब्ध रखने का निर्देश दिया. पशुओं के उपचार के लिए आवश्यक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने को भी कहा गया.

राहत सामग्री और बाढ़ आश्रय स्थलों का करें निरीक्षण

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े सभी अंचलाधिकारियों को अपने-अपने अंचल में उपलब्ध राहत सामग्री, विशेषकर पॉलीथीन शीट आदि का भौतिक निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया. इसके साथ ही बाढ़ आश्रय स्थलों का निरीक्षण कर वहां जरूरी मरम्मत और रखरखाव सुनिश्चित करने को कहा गया.

राहत शिविरों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था का निर्देश

डीएम ने स्वच्छ पेयजल से संबंधित पदाधिकारियों को सभी चिह्नित राहत शिविरों में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा. खराब चापाकलों की मरम्मत कराने और जरूरत वाले राहत शिविरों में नए चापाकल उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया गया.

एसओपी के अनुसार राहत और बचाव कार्य करने का निर्देश

डीएम आशुतोष द्विवेदी ने सभी पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ पीड़ित परिवारों के राहत एवं बचाव कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए. सभी कार्य निर्धारित एसओपी के अनुरूप किए जाएं. प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों को आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराने और जनजीवन को सामान्य बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं.

अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में उप विकास आयुक्त नेहा कुमारी, अनुमंडल पदाधिकारी सूरज कुमार, अपर समाहर्ता विनोद कुमार, अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन फिरोज अख्तर, सभी संबंधित अंचलों के वरीय पदाधिकारी और जिलास्तरीय पदाधिकारी मौजूद रहे.

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लेखक के बारे में

By सूरज कुमार गुप्ता

सूरज कुमार गुप्ता पिछले 25 वर्षों से प्रिंट मीडिया में एक्टिव है. वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत की. राजनीतिक व सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों पर पत्रकारिता करना इनकी रुचि में शामिल है. सामाजिक कार्यो में उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2007 में इन्हें भारत सरकार की ओर से तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से सम्मानित किया था.

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