Kaimur News : बहदुरा में डेढ़ वर्ष बाद लगी नल जल की टंकी, अब पाइप लाइन क्षतिग्रस्त

बघिनी पंचायत के वार्ड 09 बहदुरा में लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व तेज आंधी से गिरकर क्षतिग्रस्त हुई पानी टंकी को पीएचइडी द्वारा लगभग एक सप्ताह पूर्व लगवा दिया गया है

मोहनिया सदर. बघिनी पंचायत के वार्ड 09 बहदुरा में लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व तेज आंधी से गिरकर क्षतिग्रस्त हुई पानी टंकी को पीएचइडी द्वारा लगभग एक सप्ताह पूर्व लगवा दिया गया है, जिसकी क्षमता 5000 लीटर बतायी जाती है. प्रभात खबर में 13 मई 2025 को बघिनी पंचायत के विष्णुपुरा, अधवार, दसौंती व बहदुरा में भारी जल संकट पानी के लिए मचा हाहाकार, कहीं चापाकल खराब तो कहीं नल का जल बंद शीर्षक से बघिनी पंचायत के सभी 13 वार्डों में पीने के पानी की समस्या को लेकर विस्तृत खबर प्रकाशित किया गया था. खबर प्रकाशित होते ही प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गयी और कई जगहों पर लंबे समय से खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत करायी गयी और अब बहदुरा में भी नयी पानी टंकी लगा दी गयी है. लेकिन, लंबे समय से पानी की सप्लाई बंद होने के कारण बोरिंग स्थल अर्थात पानी टंकी से घरों तक बिछायी गयी पाइप लाइन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गयी है, जिससे लोगों के घरों तक पीने का पानी नहीं पहुंच रहा है. हालांकि, पीएचइडी पूरी तरह सक्रिय है और बहुत जल्द ही सभी पाइप लाइनों को दुरुस्त करने की तैयारी में है, जिससे सभी घरों तक सुगमता से पीने का शुद्ध पेयजल पहुंचने लगेगा. इधर, पानी टंकी के लगाये जाने से बहदुरा के ग्रामीणों में खुशी की लहर है. लोगों को पर्याप्त मात्रा में पीने का शुद्ध पानी मिलने की आशा तेज हो गयी है. – 300 से 350 फुट है बहदुरा में भूमिगत जलस्तर बहदुरा में जल संकट का सबसे बड़ा कारण यह भी है कि यहां पीने के पानी का भूमिगत जलस्तर 300 से 350 फुट पर है, इतनी गहरायी तक बोरिंग करा पाना कमजोर वर्ग के लोगों के वश की बात नहीं है. कहने के लिए तो इस गांव में छह सरकारी चापाकल लगे हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश चापाकल खराब हैं. खराब होने की स्थिति में अनुसूचित जाति के लोगों को गांव के संपन्न लोगों के घरों से पीने का पानी मांग कर लेना पड़ रहा था. हालांकि, यह मामला प्रकाश में आने के बाद पीएचइडी द्वारा खराब पड़े चापाकलों में से कुछ की मरम्मत करवा दी गयी है, जिससे वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कुछ हद तक जल संकट से लोगों को निजात मिल गयी है. यदि पीएचइडी घरों तक बिछाये गये पाइपलाइन को दुरुस्त कर देता है तो आसानी से लोगों को शुद्ध पेयजल मिलने लगेगा. यहां मतदाताओं की संख्या लगभग 550 के करीब बतायी जाती है. इस गांव में एक भी तालाब या पोखर नहीं होने से यहां भूमिगत जलस्तर हमेशा काफी नीचे रहता है. बहदुरा गांव के उत्तर तरफ कुछ ही दूरी पर दुर्गावती मुख्य नहर भी गुजरती है, लेकिन गर्मी के दिनों में वह सूख जाती है, जिससे मवेशियों के लिए भी यहां के लोगों को भारी जल संकट का सामना करना पड़ता है.

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