भभुआ नगर. शहर के टाउन हाइस्कूल में करोड़ों रुपये की लागत से भवन का निर्माण कराया गया. लेकिन, टाउन हाइस्कूल का खेल मैदान आज भी बदहाल है. खेल मैदान बदहाल होने से पठन पाठन करनेवाले छात्रों का गेम खेलने में परेशानी हो रही है. खेल मैदान की हालत यह है कि यहां पर खेल खेलना तो दूर पैदल चलना मुश्किल हो गया है. खेल मैदान में छोटे छोटे उभरे गड्ढे से पैदल चलना मुश्किल है. खेल मैदान के बिना कई खिलाड़ी प्रतिदिन प्रैक्टिस नहीं कर पा रहे हैं. हालांकि, इस तरह खस्ताहाल सिर्फ टाउन हाइस्कूल का ही खेल मैदान नहीं है, बल्कि जिले में कई माध्यमिक व उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों की यही स्थिति हैं. टाउन हाइस्कूल का खेल मैदान प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रहा है. दरअसल, तत्कालीन अपर मुख्य सचिव शिक्षा विभाग केके पाठक जब पदभार ग्रहण किये थे, तब विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर हो इसके लिए प्राइमरी से लेकर माध्यमिक विद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति की गयी है. इतना ही नहीं विद्यालय पढ़ने वाले छात्रों को विद्यालय भवन के अभाव में फर्श पर बैठना नहीं पड़े व एक वर्ग कक्ष में निर्धारित क्षमता से ज्यादा छात्र ना पढ़े. इसके लिए बेंच कुर्सी से लेकर प्री फैब स्ट्रक्चर का निर्माण कराया गया है. ताकि छात्रों को कोई परेशानी नहीं हो. लेकिन अभी तक जिले के कई हाइस्कूल में स्थित खेल मैदान पर विभाग द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया गया है. विभाग द्वारा खेल मैदान पर ध्यान नहीं दिये जाने के कारण विद्यालयों में स्थित खेल मैदान दम तोड़ रहा है, यानी खेल मैदान पर गड्ढे उभर आये हैं या घास सहित अन्य जंगली पौधे जम गये हैं. कई मैदान तो इस स्थिति में पहुंच गयी है कि खेल मैदान पर खिलाड़ियों को खेलना तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है. लेकिन, इस पर ना तो शिक्षा विभाग के अधिकारी ध्यान देते हैं और ना ही विद्यालय के प्रिंसिपल ध्यान दे रहे हैं. = टाउन हाइस्कूल के छात्र कोष में करोड़ों रुपये हैं जमा शहर के टाउन हाइस्कूल खेल मैदान की स्थिति यह है कि अगर थोड़ी देर भी बारिश हो जाये तो खेल मैदान में खेलना तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल हो जायेगा. जबकि, टाउन हाइस्कूल के छात्र कोष में करोड़ों रुपये जमा हैं. इसके बावजूद खेल मैदान की स्थिति बद से बदतर है. खेल मैदान रखरखाव के अभाव में पूरी तरह से बदहाल हालत में है. स्थिति है विद्यालय में खेल मैदान रहने के बाद भी विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र खेल की प्रैक्टिस के लिए जगजीवन स्टेडियम या अन्य जगह जाते हैं. यह हाल केवल टाउन हाइस्कूल का ही नहीं है. बल्कि शहर के सटे अखलासपुर स्थित श्रीमती उदासी देवी हाइस्कूल खेल मैदान का भी है. विद्यालय के रखरखाव व अन्य कारण के चलते खेल मैदान बदहाल है. यह जिला मुख्यालय के विद्यालयों का हाल है. कमोबेश प्रखंडों में स्थित कई हाइस्कूलों के खेल मैदान का यही हाल है. = सिंघी हाइस्कूल की छात्राएं खेल चुकी है नेशनल हॉकी भगवानपुर प्रखंड क्षेत्र के सिंधी हाइस्कूल की दो छात्राएं जूनियर नेशनल हॉकी खेल चुकी है. लेकिन खेल मैदान बद से बदतर स्थित में है. खेल मैदान पर मुखिया द्वारा मनरेगा योजना से मिट्टी की भराई करायी गयी है. लेकिन, मिट्टी भराई के बाद लेबलिंग नहीं करने के कारण खेल मैदान पर घांस फूस सहित कई झाड़ियां उग गयी हैं. इसके बावजूद शिक्षा विभाग हो या जिला प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है. विद्यालयों में शारीरिक शिक्षकों की नियुक्ति जिले के हाइस्कूलों व मध्य विद्यालय में स्थित खेल मैदान बद से बदतर है. लेकिन विद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों को खेल के प्रति प्रोत्साहित व गेम खिलाने के लिए सरकार द्वारा शारीरिक शिक्षकों की नियुक्ति की गयी है. लेकिन शारीरिक शिक्षक विद्यालय में खेल मैदान सहित अन्य संसाधन नहीं रहने के कारण विद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों को गेम नहीं खिलाते हैं, बल्कि पठन-पाठन का कार्य करते हैं. यह केवल एक दो विद्यालयों का हाल नहीं है, बल्कि कमोबेश जिले के सभी विद्यालयों का यही हाल है. = क्या कहते हैं डीपीओ इस संबंध में पूछे जाने पर डीपीओ समग्र शिक्षा अभियान के विकास कुमार डीएन ने कहा कि जिले के कितने विद्यालयों का खेल मैदान बदहाल हैं. इसकी सूची मंगाते हुए वरीय पदाधिकारी को सूचना दी जायेगी, ताकि खेल मैदान की बदहाली हो दूर किया जा सके.
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