प्रार्थना के दौरान अचानक गिरीं 6 छात्राएं, भूत-प्रेत की अफवाह से स्कूल में मची भगदड़, क्या आया सामने

Bihar News: भभुआ के कुडनू मिडिल स्कूल में प्रार्थना के दौरान 6 छात्राएं बेहोश हो गईं. इससे स्कूल में हड़कंप मच गया. ग्रामीणों ने भूत-प्रेत की अफवाह उड़ाकर इलाज करने से रोका प्रशासन ने समय पर पहुंचकर लोगों को समझाया और बच्चियों को अस्पताल पहुंचाया.

Bihar News: कैमूर जिले के चांद प्रखंड के कुडनू मध्य विद्यालय में मंगलवार की सुबह हर दिन की तरह प्रार्थना सभा चल रही थी. बच्चे कतारों में खड़े होकर प्रार्थना कर रहे थे कि अचानक एक के बाद एक छह छात्राएं जमीन पर गिरकर बेहोश होने लगीं. बच्चियों को इस तरह अचानक गिरते और छटपटाते देख स्कूल परिसर में हड़कंप मच गया. शिक्षकों ने तुरंत उन्हें संभालने की कोशिश की, लेकिन एक साथ इतनी छात्राओं के अचेत होने से स्कूल के बाकी बच्चे और स्टाफ बुरी तरह डर गए. देखते ही देखते यह खबर पूरे गांव में आग की तरह फैल गई.

भूत-प्रेत की अफवाह

ग्रामीण जब स्कूल पहुंचे तो वहां का नजारा बेहद डरावना था. बच्चियों को बेहोश देख महिलाओं ने चीखना-चिल्लाना और रोना शुरू कर दिया. इस दौरान विज्ञान और समझदारी पर अंधविश्वास भारी पड़ता दिखा. कुछ ग्रामीणों ने शोर मचाना शुरू कर दिया कि स्कूल में भूत-प्रेत का साया है. लोगों का दावा था कि पिछले दो-तीन दिनों से यहां बच्चे बीमार पड़ रहे हैं. अंधविश्वास इस कदर हावी था कि ग्रामीणों ने बच्चियों को अस्पताल ले जाने के बजाय ओझा-गुनी से झाड़-फूंक कराने की जिद पकड़ ली और लगभग एक घंटे तक उन्हें स्कूल में ही रोके रखा.

प्रशासन की सक्रियता से टली बड़ी अनहोनी

मामले की गंभीरता को देखते हुए चांद थाना प्रभारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) राजन कुमार, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) विकास कुमार तुरंत मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने देखा कि ग्रामीण बच्चियों को चिकित्सा सुविधा देने के बजाय झाड़-फूंक के चक्कर में पड़कर उनकी जान जोखिम में डाल रहे हैं. प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए ग्रामीणों को समझाया और एम्बुलेंस बुलवाई. अधिकारियों ने ग्रामीणों को तर्क दिए कि उमस, कमजोरी या घबराहट की वजह से बच्चे अक्सर प्रार्थना में बेहोश हो जाते हैं. काफी मशक्कत और समझाने-बुझाने के बाद ग्रामीण बच्चियों को अस्पताल भेजने के लिए राजी हुए.

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अस्पताल में इलाज और डॉक्टरों की राय

सभी बेहोश छात्राओं को तुरंत चांद के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. वहां डॉक्टरों की टीम ने तत्काल उनका उपचार शुरू किया. प्राथमिक उपचार के कुछ ही समय बाद सभी बच्चियों की हालत सामान्य हो गई. डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि यह कोई अलौकिक शक्ति नहीं बल्कि शारीरिक कमजोरी, खाली पेट स्कूल आना या गर्मी के कारण होने वाली सामान्य मेडिकल स्थिति है. जिला शिक्षा पदाधिकारी राजन कुमार ने बताया कि सभी छात्राएं अब पूरी तरह सुरक्षित हैं और घबराने की कोई बात नहीं है. उन्होंने स्कूल प्रशासन को निर्देश दिए कि बच्चों को बहुत देर तक धूप या प्रार्थना में खड़ा न रखा जाए और उन्हें तुरंत पानी व बैठने की सुविधा दी जाए.

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By Paritosh Shahi

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.

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