राष्ट्रीय लोक अदालत से सुलभ न्याय का रास्ता आसान, समझौते से दोनों पक्षों को मिलती है राहत: एसडीजेएम

मोहनियां व्यवहार न्यायालय में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी समझौते से कई मामलों का निपटारा किया गया। जानें लोक अदालत का महत्व और इसके लाभ।

Lok Adalat in Mahonia : मोहनियां सदर में शनिवार को अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में मामलों की सुनवाई के दौरान बेंच संख्या 11 पर मौजूद एसडीजेएम अंकिता राज ने कहा कि सभी को सुलभ न्याय दिलाने का सबसे बड़ा माध्यम राष्ट्रीय लोक अदालत है. लोक अदालत में सुलहनीय मामलों का दोनों पक्षों की आपसी रजामंदी से निपटारा किया जाता है. इसमें न किसी पक्ष की जीत होती है और न ही किसी पक्ष की हार. आपसी समझौते के आधार पर दोनों पक्ष लंबे समय तक चलने वाली मुकदमेबाजी से छुटकारा पा लेते हैं.

सुलहनीय मामलों में आगे आने की अपील

एसडीजेएम अंकिता राज ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य हर व्यक्ति को सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है. जो मामले सुलहनीय हैं, उनमें लोगों को आगे आकर आपसी सहमति से मामलों का सौहार्दपूर्ण तरीके से निपटारा करना चाहिए. इससे समय और धन दोनों की बचत होती है और पक्षकारों को मुकदमेबाजी से राहत मिलती है.

बेंच संख्या 11 पर 26 मामलों का निष्पादन

मामलों के निष्पादन के लिए गठित बेंच संख्या 11 पर न्यायाधीश अंकिता राज ने 26 सुलहनीय मामलों का निष्पादन किया. इस दौरान सदस्य के रूप में अधिवक्ता श्याम बिहारी सिंह मौजूद रहे. सहायक के तौर पर दीपक कुमार और रितेश कुमार ने सहयोग किया.

बेंच संख्या 12 पर 34 मामलों का निपटारा

वहीं, बेंच संख्या 12 पर न्यायाधीश गौरव तिवारी ने 34 मामलों की सुनवाई कर उनका निष्पादन किया. उनके सहयोग के लिए हरिकेश राय और निरंजन राय मौजूद रहे, जबकि सदस्य के रूप में जगमोहन सिंह ने अपनी भूमिका निभायी.

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By विकास कुमार

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