कैमूर: राष्ट्रीय लोक अदालत में 1902 मामलों का निपटारा, 4.60 करोड़ रुपये का सेटलमेंट

भभुआ में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में 1902 मामलों का आपसी सुलह से निपटारा हुआ। इस दौरान 4 करोड़ 60 लाख रुपये से अधिक का समझौता किया गया।

Lok Adalat in Kaimur : भभुआ परिवार न्यायालय परिसर, भभुआ और व्यवहार न्यायालय, मोहनियां में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया. इसका उद्घाटन परिवार न्यायालय, भभुआ के प्रधान न्यायाधीश विवेक कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया. इस दौरान न्यायिक पदाधिकारी, अधिवक्ता और बड़ी संख्या में पक्षकार व आम लोग मौजूद रहे. राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी समझौते और सुलह के आधार पर कुल 1902 मामलों का निपटारा किया गया. इन मामलों में समझौते के तहत कुल 4 करोड़ 60 लाख 38 हजार 986 रुपये की राशि का सेटलमेंट हुआ.

ट्रैफिक चालान में 50 प्रतिशत तक की छूट

आम नागरिकों को सुविधा देने के उद्देश्य से ट्रैफिक चालान से संबंधित मामलों में 50 प्रतिशत तक की विशेष छूट का प्रावधान किया गया था. इसका लाभ संबंधित मामलों के पक्षकारों को मिला.

सुलहनीय मामलों का आसानी से होता है निपटारा

उद्घाटन के दौरान प्रधान न्यायाधीश विवेक कुमार ने कहा कि दो साल से कम सजा वाले मामले सामान्यतः सुलहनीय होते हैं. ऐसे मामलों का लोक अदालत के माध्यम से आपसी समझौते के आधार पर निपटारा किया जाता है. लोक अदालत का उद्देश्य आपसी सहमति और सुलह के माध्यम से मामलों का शीघ्र निपटारा करना, न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ कम करना तथा समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखना है.

उन्होंने बताया कि न्यायालय के करीब 80 प्रतिशत मामले सुलहनीय प्रकृति के होते हैं. इन्हें पक्षकारों की आपसी सहमति से लोक अदालत के माध्यम से निपटाया जा सकता है. इससे न्यायालय का अधिक समय गंभीर एवं लंबित आपराधिक तथा दीवानी मामलों की सुनवाई में लगाया जा सकता है.

11 पीठों का किया गया गठन

राष्ट्रीय लोक अदालत में मामलों के निपटारे के लिए कुल 11 पीठों का गठन किया गया था. प्रत्येक पीठ में एक न्यायिक पदाधिकारी, एक अधिवक्ता और एक कार्यपालक सहायक को शामिल किया गया था. इन पीठों के माध्यम से विभिन्न न्यायालयों में लंबित मामलों की सुनवाई कर समझौते के आधार पर उनका निष्पादन किया गया.

लोक अदालत में मुकदमे से पूर्व के वाद, सुलहनीय आपराधिक वाद, एनआइ एक्ट की धारा 138 के मामले, बैंक ऋण वसूली वाद, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के मामले, वैवाहिक एवं पारिवारिक विवाद, श्रम विवाद, भूमि अधिग्रहण, राजस्व, बीएसएनएल टेलीफोन, बिजली बिल, सेवा संबंधी मामलों सहित अन्य दीवानी वादों का निपटारा किया गया.

आपसी सहमति से विवादों का करें समाधान

प्रधान न्यायाधीश विवेक कुमार ने कहा कि लोक अदालत आपसी सहमति और समझौते के आधार पर विवादों का शीघ्र एवं सरल समाधान उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है. उन्होंने कहा कि लोगों को अपने विवादों को बातचीत और सुलह के माध्यम से समाप्त करने की पहल करनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि समझौते से मामलों का निपटारा होने पर दोनों पक्षों के बीच संबंध बेहतर बने रहते हैं और समय व धन की भी बचत होती है. लोक अदालत का उद्देश्य किसी एक पक्ष की जीत या हार नहीं, बल्कि दोनों पक्षों की सहमति से विवाद का समाधान कराना है.

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि छोटे-छोटे विवादों को लेकर लंबे समय तक न्यायालय में मुकदमा चलाना किसी के हित में नहीं है. आपसी समझ और सहमति से विवाद समाप्त होने पर लोगों को मानसिक परेशानी से भी राहत मिलती है. उन्होंने लोगों से लंबित मामलों में समझौते की संभावना तलाशने और लोक अदालत के माध्यम से त्वरित निपटारा कराने की अपील की.

भभुआ व मोहनियां में निपटाये गये मामलों का विवरण

  • कोर्ट केस: 267, सेटलमेंट अमाउंट 27,000 रुपये.
  • नीलाम पत्र केस: 295, सेटलमेंट अमाउंट 1,96,27,322 रुपये.
  • बैंक केस: 552, सेटलमेंट अमाउंट 2,51,12,922 रुपये.
  • ट्रैफिक चालान केस: 781, सेटलमेंट अमाउंट 12,63,800 रुपये.
  • बीएसएनएल टेलीफोन केस: 7, सेटलमेंट अमाउंट 7,942 रुपये.

लोक अदालत के माध्यम से मामलों के निपटारे से न्यायालयों पर मुकदमों का बोझ कम होने के साथ आम लोगों को सुलभ, त्वरित और कम खर्च में न्याय मिलने का रास्ता भी आसान हुआ.

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By विकास कुमार

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