Kaimur News : हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव यानी कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व है. इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर, शुक्रवार को रोहिणी नक्षत्र के संयोग में मनाया जायेगा. इसे लेकर भभुआ शहर में धार्मिक उत्साह का माहौल है. शहर के श्रीकृष्ण इस्कॉन नामहट्ट सेंटर में बुधवार से चार दिवसीय श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महामहोत्सव शुरू हो गया है. वहीं, जन्माष्टमी को लेकर बाजारों में भी सजावट और पूजन सामग्री की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ बढ़ने लगी है.
रोहिणी नक्षत्र में होगा श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव
ज्योतिषविद पंडित हरिशंकर तिवारी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में अर्धरात्रि के समय हुआ था. इसलिए इस तिथि और नक्षत्र का संयोग जन्माष्टमी के पर्व को विशेष बना देता है. इस बार अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात 2 बजकर 25 मिनट से शुरू होगी और 5 सितंबर की रात 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि और भगवान श्रीकृष्ण के जन्मकाल को ध्यान में रखते हुए 4 सितंबर को जन्माष्टमी मनाई जायेगी.
मध्यरात्रि में अष्टमी और रोहिणी का संयोग
इस वर्ष जन्माष्टमी की मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का भी संयोग रहेगा. इस दौरान चंद्रमा वृषभ राशि में स्थित रहेगा. भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की पूजा के लिए 4 सितंबर की रात 11 बजकर 57 मिनट से 5 सितंबर की रात 12 बजकर 43 मिनट तक का समय शुभ माना गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस विशेष संयोग में श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना का महत्व और बढ़ जाता है.
इस्कॉन मंदिर में चार दिन चलेगा महामहोत्सव
शहर के श्रीकृष्ण इस्कॉन नामहट्ट सेंटर में 2 सितंबर से 5 सितंबर तक चार दिवसीय श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महामहोत्सव आयोजित किया जा रहा है. इस्कॉन भभुआ प्रबंधक समिति के अध्यक्ष डॉ विनोद कुमार ने बताया कि बुधवार को मंगला आरती के बाद पूरे दिन कीर्तन मेला आयोजित किया गया. संध्या आरती के बाद वृंदावन से आये विजय कृष्ण प्रभु द्वारा कीर्तन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए. कार्यक्रम के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया.
जन्माष्टमी पर महाभिषेक और 56 भोग
जन्माष्टमी के दिन मंदिर में सुबह 4:30 बजे मंगला आरती और शृंगार आरती होगी. सुबह 7:30 बजे गुरु पूजा और 8 बजे भागवतम क्लास का आयोजन होगा. शाम 7 बजे गौर आरती के बाद रात 8 बजे श्रीकृष्ण कथा एवं भजन-कीर्तन होगा. रात 10 बजे भगवान श्रीकृष्ण का महाभिषेक किया जायेगा. मध्यरात्रि 12 बजे भगवान को 56 प्रकार का भोग अर्पित किया जायेगा. इसके बाद श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण का दर्शन-पूजन करेंगे और महाआरती होगी. अंत में प्रसाद वितरण किया जायेगा.
नंदोत्सव के साथ होगा महामहोत्सव का समापन
5 सितंबर को मंदिर में नंदोत्सव और श्री प्रभुपाद उत्सव मनाया जायेगा. इसके साथ ही चार दिवसीय श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महामहोत्सव का समापन होगा. आयोजन को लेकर मंदिर परिसर में विशेष सजावट की गयी है और श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारी की गयी है.
जन्माष्टमी को लेकर बाजार में बढ़ी रौनक
इधर, पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश के बावजूद जन्माष्टमी को लेकर भभुआ के बाजार सज गये हैं. कृष्ण भक्त पूजन और सजावट की सामग्री खरीदने के लिए बाजार पहुंच रहे हैं. बाजार में खीरे की विशेष मांग देखी जा रही है. इसके अलावा भगवान श्रीकृष्ण के लिए झूले, पालकी और सजावट के सामान की भी खरीदारी हो रही है.
मंदिरों में सजावट, घरों में व्रत की तैयारी
शहर के वार्ड पार्षद और कृष्ण भक्त महेश दास उर्फ प्रभुजी ने बताया कि जन्माष्टमी को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गयी हैं. मंदिरों की साफ-सफाई और भव्य सजावट करायी जा रही है. शहर में जगह-जगह श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित होंगे. श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करेंगे और मध्यरात्रि में उनके जन्मोत्सव में शामिल होंगे.
