दुर्गावती. पहाड़ी एवं मैदानी क्षेत्रों में दो दिनों से लगातार झमाझम बारिश के कारण दुर्गावती और कर्मनाशा नदी उफान पर है. दोनों नदियों का जलस्तर बुधवार की सुबह से ही तेज गति से बढ़ने लगा. जलस्तर बढ़ने से प्रखंड क्षेत्र में किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न हो गयी है.
नुआंव के पास सड़क पर तेज धारा से आवागमन बंद
दुर्गावती ककरैत पथ पर कर्मनाशा नदी का पानी बुधवार को दोपहर तक नुआंव के पास सड़क पर बहने लगा. इसी दौरान वहां शीशम का पेड़ गिर गया, जिससे रास्ता कुछ देर के लिए बाधित रहा. ग्रामीणों ने पेड़ को काटकर रास्ता चालू कराया. हालांकि शाम होते-होते नदी की धारा तेज गति से सड़क पर बहने लगी. इसके बाद प्रशासन ने वहां आवागमन बंद कर दिया.
लोगों को सैयदराजा होकर करना पड़ रहा आवागमन
आवागमन बंद होने से लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. यह रास्ता एमपी, बिहार और यूपी, नेपाल तक जोड़ता है और काफी संख्या में लोग इस रास्ते से आवागमन करते हैं. गुरुवार की सुबह भी वहां रास्ता बंद था. ऐसे में लोग काफी दूरी का रास्ता तय कर सैयदराजा होकर अपने गंतव्य को रवाना हो रहे हैं.
खजुरा नौबतपुर के पास जलस्तर घटने से मिली राहत
खजुरा नौबतपुर स्थित कर्मनाशा नदी के पुल के दक्षिण की तरफ नदी का जलस्तर बुधवार की शाम से ही घटना शुरू हुआ है. इससे उधर के लोगों ने कुछ राहत की सांस ली है. हालांकि निचले इलाकों में दुर्गावती प्रखंड क्षेत्र के मसौढ़ा पंचायत में कर्मनाशा नदी का जलस्तर गुरुवार को भी बढ़ रहा था.
कई सड़कों पर बाढ़ का पानी बहने लगा
बुधवार की शाम चेहरियां के समीप तथा दुर्गावती चैनपुर पथ पर चोगड़ा पुल पर दुर्गावती नदी का पानी सड़क पर बहने लगा. वहीं डहला मोड़ एवं मरहियां हाटा पथ पर खमीदौरा के पास बाढ़ का पानी कभी भी सड़क पार करने की संभावना है.
उच्च विद्यालय के परिसर में घुसा बाढ़ का पानी
दुर्गावती बाजार स्थित उच्च विद्यालय के प्रांगण में नदी का पानी भर गया है. इससे विद्यालय में पठन-पाठन प्रभावित हो गया है. बाढ़ के पानी के कारण आसपास के क्षेत्रों में भी लोगों की परेशानी बढ़ गयी है.
दर्जनों गांवों की फसल प्रभावित होने की आशंका
दुर्गावती प्रखंड क्षेत्र के डहला, सरियांव, गोरार, मछनहटा, चेहरियां, कुशहरियां, चोगड़ा, मनोहरपुर, खमीदौरा, धनिहारी सहित दर्जनभर गांवों के किसानों की फसल प्रभावित होने की संभावना बढ़ गयी है.
जलाशय से पानी छोड़े जाने के बाद बढ़ा जलस्तर
पिछले दो दिनों से झमाझम बारिश होने से दुर्गावती जलाशय से पानी छोड़ा जा रहा है. इससे दुर्गावती नदी के जलस्तर में काफी बढ़ोतरी होने लगी है. बुधवार को दुर्गावती प्रखंड के दक्षिण तरफ खेतों में दुर्गावती नदी के बाढ़ का पानी दूर-दूर तक दिखाई देने लगा. क्षेत्र के किसानों की सैकड़ों एकड़ धान की फसल देखते ही देखते पानी में डूब गयी.
फसल बर्बाद होने की बढ़ी चिंता
ग्रामीणों के अनुसार, यदि बाढ़ का पानी दो-चार दिन और खेतों में जमा रहा तो किसानों की धान की फसल बर्बाद होने की संभावना बढ़ जाएगी. दुर्गावती नदी का जलस्तर घटने का नाम नहीं ले रहा है. गुरुवार की सुबह भी नदी का जलस्तर बढ़ाव पर था. ऐसे में शाम तक डहला मोड़ के पास भी नदी का पानी सड़क पार करने की संभावना है.
चेहरियां के पास पानी की तेज धारा से सावधानी की जरूरत
लोग चेहरियां के पास पानी से होकर वाहन सहित पार हो जा रहे थे. दो वर्ष पूर्व चेहरियां बाजार के पास एक लड़का तेज धारा में बह गया था. पिछली घटना को देखते हुए पानी की धारा तेज होने पर लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गयी है.
निपरान गांव बना टापू
दुर्गावती प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत निपरान गांव कर्मनाशा नदी के बाढ़ के पानी से चारों तरफ से घिर गया है. निपरान गांव जाने वाले रास्ते पर करीब आठ फुट पानी बह रहा है. इससे गांव के लोग बाजार आकर जरूरी सामान भी नहीं खरीद पा रहे हैं. बाढ़ के कारण ग्रामीणों के सामने काफी परेशानी बढ़ गयी है.
ग्रामीणों ने नाव की व्यवस्था की मांग की
निपरान गांव में बाढ़ आने पर प्रशासन की ओर से हर साल नाव की व्यवस्था करायी जाती है. इस साल भी ग्रामीणों ने प्रशासन से नाव की व्यवस्था करने की मांग की है. लोगों का कहना है कि किसी व्यक्ति के बीमार होने या जरूरी सामान खरीदने के लिए बाजार आने की स्थिति में नाव की सुविधा जरूरी है.
सीओ ने गांव का जायजा लेकर दिया भरोसा
दुर्गावती अंचलाधिकारी ने बुधवार को निपरान गांव का जायजा लिया और नाव की व्यवस्था करने का लोगों को भरोसा दिया. ग्रामीण डॉक्टर मिथिलेश यादव और सिपाही यादव ने बताया कि पिछले साल की तरह इस वर्ष भी निपरान गांव कर्मनाशा नदी की बाढ़ से घिर गया है. किसानों की फसलें बाढ़ में डूब गयी हैं और गांव के रास्ते पर आठ से दस फीट बाढ़ का पानी बह रहा है.
जल्द नाव उपलब्ध कराने की मांग
ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ के पानी के कारण गांव से बाजार आना-जाना बंद हो गया है. ऐसी स्थिति में प्रशासन को जल्द से जल्द नाव उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि लोग बाढ़ के बीच बाजार जाकर जरूरी सामान खरीद सकें.
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