Kaimur News: कैमूर वन प्रमंडल द्वारा जिले के गैर-वन क्षेत्रों में जंगली जानवरों के हमले से होने वाले नुकसान को लेकर महत्वपूर्ण सूचना जारी की गई है. वन विभाग के अनुसार, यदि गैर-वन प्रक्षेत्र में किसी भी प्रकार के जंगली जीव द्वारा किसी व्यक्ति की मृत्यु/घायल होने, पशुधन की हानि या मकान/फसल को क्षति पहुंचती है, तो सरकार द्वारा पीड़ित पक्ष को निर्धारित सहायता राशि प्रदान की जाएगी.
1. मनुष्य की मृत्यु या घायल होने पर मिलने वाली सहायता
बाघ, तेंदुआ, हाथी, गौर, जंगली सूअर, लकड़बग्घा, सियार, भेड़िया, गैंडा, भालू, जंगली कुत्ता, मगरमच्छ और घड़ियाल के हमले में:
- मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता होने पर: ₹10,00,000 (दस लाख रुपये)
- गंभीर रूप से घायल होने पर: ₹1,44,000 (एक लाख चौवालिस हजार रुपये)
- सामान्य रूप से घायल होने पर: ₹24,000 (चौबीस हजार रुपये)
2. पालतू पशुओं की मौत पर मुआवजा
बाघ, तेंदुआ, हाथी, लकड़बग्घा, भेड़िया और भालू द्वारा पालतू पशुओं का शिकार किए जाने पर:
- गाय, भैंस या बैल की मृत्यु पर: ₹24,000 प्रति पशु
- भेड़ या बकरे की मृत्यु पर: ₹40,000 प्रति पशु
- बकरी की मृत्यु होने पर: ₹7,200 प्रति पशु
3. मकान क्षतिग्रस्त होने पर राहत राशि
हाथी, गौर एवं गैंडे द्वारा मकानों को नुकसान पहुंचाने पर:
- पक्का मकान पूरी तरह नष्ट होने पर: ₹96,000
- मिट्टी/खपरैल/शीट की छत वाला मकान पूरी तरह नष्ट होने पर: ₹48,000
- पक्का मकान गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने पर: ₹48,000
- कच्चा मकान गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने पर: ₹24,000
- साधारण रूप से क्षतिग्रस्त मकान पर: ₹12,000
4. फसल क्षति पर मुआवजा
हाथी, घोड़परास (नीलगाय) और जंगली सूअर द्वारा खेती को नुकसान पहुंचाने पर:
- फसल की क्षति पर: ₹50,000 प्रति हेक्टेयर
हेल्पलाइन नंबर: किसी भी प्रकार की शिकायत या अधिक जानकारी के लिए वन विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800 345 7252 पर संपर्क किया जा सकता है.
Also Read: स्वास्थ्य विभाग की बड़ी पहल: अब डेटा की सटीकता से मजबूत होगा 'चाइल्ड हेल्थ'
