आरटीपीएस के मामलों को समय से निष्पादित नहीं करने पर हुई कार्रवाई
भभुआ नगर : लोक सेवा अधिकार अधिनियम के अंतर्गत आरटीपीएस पर प्राप्त आवेदनों को निर्धारित समय से निष्पादित नहीं करने के मामले में 10 सरकारी बाबुओं पर चार लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. इनमें बीडीओ, सीओ, पंचायत सचिव व राजस्वकर्मी शामिल हैं. सामान्य प्रशासन विभाग ने इस मामले में नये सिरे से 10 पदाधिकारी व कर्मचारियों को चिह्नित किया है. जबकि, पहले 24 लोगों पर कार्रवाई की जा चुकी है. उल्लेखनीय है कि लोक सेवा अधिकार अधिनियम आमलोगों को निर्धारित समयसीमा के भीतर कुछ चुनी हुई लोक सेवाएं उपलब्ध करानेवाला कानून है.
इसके अंतर्गत राज्य सरकार ने फिलहाल 10 विभागों से जुड़ी 50 सेवाओं को सूचीबद्ध किया है, जिसमें राशनकार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, जाति, चरित्र और आमदनी से संबंधित प्रमाणपत्र दिये जाने जैसी सुविधाएं प्रमुख हैं. इस अधिनियम का सबसे खास प्रावधान यह है कि निर्धारित किये गये समय में आवेदकों को लोक सेवाएं उपलब्ध नहीं कराने पर संबंधित सरकारी अधिकारी व कर्मचारी को दंडित करने का भी प्रावधान है.
इसके अंतर्गत ढाई सौ रुपये से लेकर अधिकतम पांच हजार रुपये तक के आर्थिक दंड का प्रावधान है. जरूरत पड़ने पर विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है. जिले में इसके अंतर्गत अब तक कुल 34 पदाधिकारी व कर्मचारी पर कुल 10 लाख 95 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है. जुर्माने के रुपये अब संबंधित सरकारीकर्मियों के वेतन से वसूले जायेंगे, जिसकी अनुशंसा एसडीओ डीएम से करेंगे.
नौ बिचौलिये हुए गिरफ्तार : बिचौलिये के प्रभाव को आरटीपीएस काउंटर से समाप्त करने के लिए जिले के वरीय उपसमाहर्ता प्रत्येक शनिवार को आरटीपीएस काउंटरों की जांच करते हैं, जिसमें अब तक कुल 1590 बार विभिन्न काउंटरों की जांच हुई है, जिसमें नौ बिचौलियों को चिह्नित कर उन्हें गिरफ्तार भी किया जा चुका है.
27 लाख से अधिक आवेदन हुए निष्पादित : लोक सेवा अधिकार अधिनियम 15 अगस्त 2011 में शुरू हुआ, जिसमें कैमूर जिले में अब तक कुल ऑनलाइन दो लाख 62 हजार 725 व ऑफलाइन यानी आरटीपीएस काउंटर पर 25 लाख 254 आवेदन प्राप्त हुए, जिसमें ऑफलाइन आये 24 लाख 49 हजार 1077 व ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों में दो लाख 61 हजार 971 आवेदन निष्पादित किये गये. 11536 आवेदनों पर अपील भी दायर की गयी, जिसमें 11550 मामलों को निष्पादित किया गया है. अब तक जुर्माने के रूप में 10 लाख 95 हजार में चार लाख 87 हजार की वसूली की जा चुकी है.
