सेसंबा व उचिटा पंचायत के कुछ गांवों को जोड़कर शकूराबाद को नगर पंचायत बनाए जाने के प्रस्ताव के विरोध में सोमवार की देर शाम ग्रामीणों ने शकूराबाद बाजार स्थित बाजार प्रांगण से कैंडल मार्च निकाला. इसमें पंचायत के विभिन्न गांवों से पहुंचे सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लिया. ग्रामीणों ने नेहालपुर मोड़ से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शकूराबाद तक एवं उचिटा से प्रखंड मुख्यालय तक पदयात्रा कर नगर पंचायत के प्रस्ताव का विरोध जताया.
कृषि आधारित क्षेत्र को नगर पंचायत में शामिल करने का विरोध
ग्रामीणों का कहना है कि सेसंबा और उचिटा पंचायत का अधिकांश क्षेत्र पूरी तरह कृषि आधारित है. पंचायत के अधिकतर वार्डों में बड़ी संख्या में किसान खेती पर निर्भर हैं. यदि पंचायत को नगर पंचायत का दर्जा दिया जाता है, तो कृषि योग्य भूमि से जुड़े कई सरकारी कार्य प्रभावित होंगे.
ग्रामीणों ने आशंका जतायी कि टूटे तटबंधों की मरम्मत, खेतों के अलंग, जल निकासी तथा कृषि से संबंधित अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन में परेशानी उत्पन्न हो सकती है. इसका सीधा असर किसानों पर पड़ेगा.
पांच से छह किलोमीटर दूर गांवों को शामिल करने पर सवाल
ग्रामीणों ने कहा कि नगर पंचायत का कोरम पूरा करने के लिए उचिटा पंचायत के उचिटा, लालूबिगहा व फरीदपुर गांव को भी प्रस्तावित क्षेत्र में शामिल किया जा रहा है. इन गांवों की दूरी शकूराबाद बाजार से करीब पांच से छह किलोमीटर है.
ग्रामीणों के अनुसार, इन गांवों से पहले हसनपुरा, सदर प्रखंड के बसंतपुर, चैनपुरा और करौता जैसे गांव आते हैं. इन क्षेत्रों में भी अधिकांश भूमि कृषि योग्य है. ऐसे में दूर स्थित गांवों को प्रस्तावित नगर पंचायत में शामिल करने के औचित्य पर ग्रामीणों ने सवाल उठाया है.
करीब 90 प्रतिशत भूमि कृषि योग्य होने का दावा
ग्रामीणों का कहना है कि सेसंबा पंचायत में शकूराबाद बाजार के मात्र चार वार्ड ऐसे हैं, जहां भूमि का स्वरूप कृषि आधारित नहीं है. इसके बावजूद प्रस्तावित नगर पंचायत के परिसीमन में करीब 90 प्रतिशत भूमि कृषि योग्य क्षेत्र में आती है. ऐसे में पूरे क्षेत्र को नगर पंचायत में शामिल करना किसानों के हित में नहीं है.
अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ने की जतायी आशंका
ग्रामीणों ने कहा कि नगर पंचायत बनने से किसानों को कोई विशेष लाभ नहीं मिलेगा, बल्कि राजस्व में वृद्धि के कारण उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है. विभिन्न प्रकार के कर एवं शुल्क बढ़ने से किसानों की परेशानी और बढ़ने की आशंका है.
ग्रामीणों ने प्रशासन एवं सरकार से मांग की है कि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और कृषि पर निर्भर आबादी को देखते हुए सेसंबा और उचिटा पंचायत को नगर पंचायत घोषित करने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया जाए.
कैंडल मार्च के दौरान ग्रामीणों ने एकजुट होकर नगर पंचायत के प्रस्ताव का विरोध किया और किसान हित में निर्णय लेने की मांग की. इस मौके पर दर्जनों की संख्या में ग्रामीण शामिल थे.
