शहर में हुई मुसलाधार बारिश से एक ओर जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली वहीं दूसरी ओर नगर परिषद के ड्रेनेज सिस्टम की पोल खोल दी.
By PANKAJ KUMAR SINGH | Updated at :
जमुई. शहर में हुई मुसलाधार बारिश से एक ओर जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली वहीं दूसरी ओर नगर परिषद के ड्रेनेज सिस्टम की पोल खोल दी. बुधवार की सुबह से ही आसमान में बादल छाये हुए थे दोपहर बाद अचानक अंधेरा छा गया और तेज हवा के साथ मुसलाधार बारिश होने लगा. बारिश के बाद शहर के विभिन्न मोहल्ला व बाजार में सड़को पर नाला का पानी जमा हो गया. इस कारण आने-जाने वाले लोगों के साथ स्थानीय लोगों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. इस कारण लोगों में नगर परिषद के प्रति आक्रोश देखा गया. स्थानीय लोगों की मानें तो नगर परिषद में फैले भ्रष्टाचार और लापरवाही का खामियाजा अक्सर शहर वासियों को भुगतना पड़ता है. स्थानीय लोगों ने बताया कि शहर की साफ-सफाई पर प्रतिमाह लाखों रुपए खर्च होते हैं इसके बावजूद थोड़ी देर की भी बारिश से ही शहर के गली-मोहल्ला में जब नाला का पानी जमा हो जाता है तो आने वाले बरसात में शहर का क्या आलम होगा ये चिंता का विषय है.
शहर में बनाया गया है नया नाला
बरसात के दिनों में शहरवासियों को जल जमाव से निजात दिलाने को लेकर नगर परिषद द्वारा शहर में दर्जनों नये नाला का निर्माण करवाया गया है. लेकिन इसके बावजूद शहर की स्थिति जस के तस बनी हुई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर परिषद के पदाधिकारी, अध्यक्ष और संवेदक की मिली भगत से मोटी कमीशन के चक्कर में जहां नाला का निर्माण होना चाहिए वहां नहीं करवाया गया जबकि जहां नाला कि कोई आवश्यकता ही नहीं है उस जगह पर नाला का निर्माण करा सरकारी राशि का बंदरबांट कर लिया गया. इस कारण शहर को जल जमाव से निजात नहीं मिल रहा है.
कई जगहों पर अब तक नहीं लगा योजना का बोर्ड
नगर परिषद के पदाधिकारियों की लापरवाही का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि नगर क्षेत्र में योजना का कार्य पूरा हो जाने के कई माह बीत जाने के बाद भी संवेदक द्वारा कार्य स्थल पर योजना से संबंधित बोर्ड तक नहीं लगाया गया है. जबकि नियम के मुताबिक निर्माण स्थल पर कार्य प्रारंभ के दौरान ही योजना स्थल पर साइन बोर्ड लगाना है जिसमें योजना का नाम, निर्माण की लागत, अभिकर्ता / संवेदक का नाम, प्राक्कलित राशि अंकित किया जाता है. ताकि निर्माण की गुणवत्ता और लोगों के बीच अन्य जानकारी बनी रहे. लेकिन नप के अधिकारियों को इन नियमों की कोई परवाह नहीं है. साथ ही संवेदक द्वारा पारित प्राक्कलित राशि के अनुसार कार्य करवाया जा रहा है या नहीं नगर परिषद के जेई को इसे भी देखने का समय नहीं है. यदि स्थानीय लोगों द्वारा संवेदक के खिलाफ वरीय पदाधिकारी से शिकायत की जाती है तो नगर परिषद के जेई संवेदक के घर पर बैठ कर चाय-नाश्ता कर पदाधिकारी को गलत रिपोर्ट कर गुमराह करने का कार्य करते हैं.
कहते हैं अध्यक्ष
नगरपरिषद के अध्यक्ष मो हलीम उर्फ लोलो मियां ने बताया कि बरसात के पहले ही शहर में होने वाले जल जमाव की समस्याओं को दूर कर दिया जायेगा. नप अध्यक्ष ने कार्यपालक पदाधिकारी डॉ प्रियंका गुप्ता पर मनमानी करने का आरोप लगाते हुये कहा कि वह मेरी बात ही नहीं सुनती है और बीना किसी योजना के मनमाने ढंग से शहर में नाला निर्माण कार्य की अनुमति दे रही है. जबकि जेई द्वारा किसी भी निर्माण स्थल का निरीक्षण नहीं किया जाता है और न ही योजना का बोर्ड लगवाया जाता है जो बिल्कुल गलत है. उन्होंने जिलाधिकारी से मिलकर इसकी शिकायत करने की बात कही.