Vaishali News: वैशाली जिले के राघोपुर प्रखंड क्षेत्र स्थित रेफरल अस्पताल मोहनपुर में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती एक और बड़ी लापरवाही सामने आई है. मंगलवार को अस्पताल पहुंचे मरीजों की निबंधन पर्ची पर चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार का नाम छपा था, लेकिन ओपीडी में मरीजों का इलाज आयुष चिकित्सक डॉ. अविनाश कुमार कर रहे थे. मामला उजागर होते ही अस्पताल परिसर में मरीजों और उनके परिजनों ने जमकर विरोध जताया और आक्रोश व्यक्त किया.
पर्ची पर चिकित्सा पदाधिकारी का नाम, इलाज कर रहे आयुष डॉक्टर
जानकारी के अनुसार, मंगलवार को ओपीडी में पर्ची कटवाने आए मरीजों को जो निबंधन पर्ची दी गई, उस पर ड्यूटी डॉक्टर के रूप में चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार का नाम अंकित था. हालांकि, मरीज जब जांच कक्ष में पहुंचे तो वहां डॉ. प्रवीण नदारद थे और उनकी जगह आयुष चिकित्सक डॉ. अविनाश कुमार मरीजों का इलाज कर रहे थे.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि डॉ. प्रवीण कुमार अक्सर अपनी ड्यूटी से नदारद रहते हैं और अपने पद का प्रभाव दिखाकर बिना किसी आधिकारिक रोस्टर या आदेश के दूसरे डॉक्टरों को अपनी कुर्सी पर बैठा देते हैं.
दो महीने में दूसरी बार सामने आई यही लापरवाही
अस्पताल की इस व्यवस्था पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि इससे पहले 8 जून को भी ठीक यही मामला सामने आया था. उस दिन भी पर्ची पर डॉ. प्रवीण कुमार का नाम था, जबकि ओपीडी में डॉ. दीपक श्रीवास्तव मरीजों को देख रहे थे. महज दो महीने के भीतर एक ही तरह की गड़बड़ी दोहराए जाने से स्वास्थ्य विभाग की निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
दवाइयां झाड़ी में फेंकने से लेकर गार्ड द्वारा दवा वितरण तक के विवाद
राघोपुर प्रखंड क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का यह कोई पहला मामला नहीं है. पिछले 2-3 महीनों के दौरान कई संगीन मामले उजागर हो चुके हैं:
- रूस्तमपुर लोहा पुल से सिक्स लेन जाने वाली सड़क किनारे हेतमपुर के पास झाड़ियों में भारी मात्रा में सरकारी दवाइयां फेंकी हुई मिली थीं.
- रेफरल अस्पताल में एक सुरक्षा गार्ड (गार्ड) द्वारा मरीजों को दवा बांटने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था.
- डॉक्टरों के देर से आने के कारण ओपीडी में बैठकर एक डाटा एंट्री ऑपरेटर द्वारा मरीजों का इलाज करने का वीडियो भी प्रसारित हो चुका है.
ग्रामीणों ने कहा कि डॉक्टर की इस मनमानी और विभागीय चुप्पी से मरीजों का भरोसा उठ रहा है. स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी चिकित्सा अधिकारी पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.
(नोट: मामले पर पक्ष जानने के लिए जब वैशाली के सिविल सर्जन डॉ. श्याम नंदन प्रसाद से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया.)
