Hajipur Flood Update : वैशाली में गंगा और गंडक नदी के जलस्तर में धीरे-धीरे कमी आ रही है, लेकिन बाढ़ का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. जिले के कई प्रखंडों और गांवों में लोगों की आवाजाही से लेकर राहत और स्वास्थ्य सुविधाओं तक के लिए प्रशासन की व्यवस्था जारी है. जिला प्रशासन के अनुसार, जिले में अब तक करीब 2,98,800 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं.
6 प्रखंडों के 87 गांव बाढ़ की चपेट में
जिले के 6 प्रखंडों की 32 पंचायतों के 87 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं. इसके अलावा 2 नगर परिषदों के 14 वार्ड भी बाढ़ की स्थिति से प्रभावित बताए गए हैं. प्रभावित लोगों के आवागमन और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए जिले में कुल 242 नावों का परिचालन किया जा रहा है.
इनमें 1 मोटर बोट, 7 सरकारी नाव और 234 निजी नाव शामिल हैं. प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य लगातार जारी रखा गया है.
राहत सामग्री का वितरण जारी
बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच अब तक 44,765 पॉलिथीन शीट, 18,680 ड्राई राशन पैकेट और 1,380 फूड पैकेट वितरित किए जा चुके हैं. प्रभावित लोगों के लिए जिले में 26 सामुदायिक रसोई भी संचालित की जा रही हैं.
सामुदायिक रसोई के माध्यम से प्रभावित लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि राहत सामग्री के वितरण के जरिए बाढ़ के कारण प्रभावित परिवारों की जरूरतों को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है.
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23 स्वास्थ्य शिविरों में 2,591 लोगों का इलाज
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 23 स्वास्थ्य शिविर संचालित किए जा रहे हैं. इन शिविरों में अब तक कुल 2,591 लोगों का उपचार किया गया है.
जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए 11,415 हैलोजन टैबलेट वितरित की गयी हैं. इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में 463 किलोग्राम ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव किया गया है.
पशुओं के लिए भी स्वास्थ्य और चारे की व्यवस्था
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं की देखभाल के लिए 14 पशु चिकित्सा शिविर संचालित हैं. इन शिविरों में अब तक 689 पशुओं का उपचार किया गया है.
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पशुपालकों के बीच 79,186 किलोग्राम पशु चारा भी वितरित किया जा चुका है. इससे बाढ़ प्रभावित पशुपालकों को अपने मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था में मदद मिल रही है.
24 घंटे बाढ़ की निगरानी
जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ की स्थिति पर 24×7 निगरानी रखी जा रही है. राहत एवं बचाव कार्यों के साथ तटबंधों की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है.
इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल और विद्युत आपूर्ति की भी निगरानी की जा रही है. जलस्तर में कमी के बावजूद प्रशासन की ओर से राहत, बचाव और जरूरी सेवाओं को लेकर सतर्कता बरती जा रही है.
