hajipur news. समाज के अंतिम व्यक्ति तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाना वित्तीय समावेशन का मुख्य उद्देश्य : क्षेत्रीय निदेशक

वित्तीय समावेशी योजनाओं का कवरेज शत-प्रतिशत सुनिश्चित करने के लिए जंदाहा में शिविर का आयोजन

हाजीपुर. भारत सरकार के वित्तीय सेवा विभाग के निर्देशानुसार ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन योजनाओं की शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शनिवार को जंदाहा की डीह बुचौली ग्राम पंचायत में एक दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया. इसका नेतृत्व रेणु सिन्हा, लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (एलडीएम) ने किया. भारतीय रिजर्व बैंक, पटना के क्षेत्रीय निदेशक सुजीत कुमार, अरविंद एवं महाप्रबंधक प्रभात कुमार ने शिविर स्थल का औचक निरीक्षण किया और अभियान की प्रगति की समीक्षा की. उन्होंने अधिकारियों, बैंकिंग संवाददाताओं (बीसी) तथा लाभार्थियों से संवाद कर वित्तीय समावेशन के महत्व पर प्रकाश डाला.

क्षेत्रीय निदेशक ने ग्रामवासियों से संवाद स्थापित कर उन्हें वित्तीय समावेशन के महत्व से अवगत कराया. उन्होंने पात्र खातों के री-केवाइसी को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने पर विशेष बल दिया. उन्होंने कहा कि री-केवाइसी की प्रक्रिया को केवल शिविर स्तर तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे बैंक शाखा स्तर पर भी सुव्यवस्थित ढंग से संचालित किया जाए, ताकि तीन से चार सप्ताह के भीतर यह कार्य पूर्ण किया जा सके.

112 खातों की हुई री-केवाइसी

शिविर के दौरान विभिन्न बैंकों ने 112 खातों की री-केवाइसी की. क्षेत्रीय निदेशक ने कहा कि वित्तीय समावेशन का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं पहुंचाना है. इन्होंने समझाया कि जब प्रत्येक नागरिक के पास बचत खाता, ऋण, बीमा, पेंशन और डिजिटल लेन-देन जैसी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं, तो वह आर्थिक रूप से अधिक सशक्त होता है. वित्तीय समावेशन केवल बैंक खाता खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीणों और वंचित तबकों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है.

पात्र व्यक्ति को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ना अभियान का उद्देश्य

लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर ने कहा कि वित्तीय समावेशन अभियान का उद्देश्य प्रत्येक पात्र व्यक्ति को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ना है. इन्होंने बताया कि बैंकिंग संवाददाताओं (बीसी) के माध्यम से गांव-गांव जाकर लोगों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाई जा रही है. यह प्रयास केवल खातों को सक्रिय करने तक सीमित नहीं है, बल्कि लाभार्थियों को बचत की आदत विकसित करने, ऋण सुविधाओं का लाभ उठाने और डिजिटल लेन-देन में दक्ष बनाने पर भी केंद्रित है. इन्होंने सभी बैंक अधिकारियों और बीसी प्रतिनिधियों से कहा कि वे ग्रामीणों से नियमित रूप से मिले, उनकी समस्याएं सुनें और समय पर समाधान सुनिश्चित करें ताकि कोई भी व्यक्ति बैंकिंग सेवाओं से वंचित न रह जाए.भारतीय रिजर्व बैंक पटना के महाप्रबंधक प्रभात कुमार ने बीसी प्रतिनिधियों को प्रोत्साहित किया कि वे गांवों में नियमित रूप से उपस्थित रहें और लाभार्थियों को डिजिटल बैंकिंग का अधिकतम उपयोग करने के लिए प्रेरित करें. इन्होंने कहा कि डिजिटल बैंकिंग सेवाओं का सही और सुरक्षित उपयोग न केवल ग्रामीणों के समय और धन की बचत करता है, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी गति देता है.

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