Hajipur News: वैशाली जिले में मॉनसून की बेरुखी ने धान उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ा दी है. जिले में औसत से कम बारिश होने के कारण किसान पंपिंग सेट और अन्य वैकल्पिक साधनों के सहारे धान की रोपनी करने को मजबूर हैं. इससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है. पिछले एक सप्ताह से बारिश नहीं होने और दिन में तेज धूप पड़ने के कारण किसानों की परेशानी और बढ़ गई है.
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जुलाई माह के अंतिम दिनों तक जिले में धान फसल आच्छादन लक्ष्य का मात्र 69.2 प्रतिशत ही पूरा हो सका है. मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों का असर उन किसानों पर भी पड़ रहा है जिन्होंने किसी तरह रोपनी पूरी कर ली है. खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने से फसल की स्थिति संतोषजनक नहीं बताई जा रही है.
पंपिंग सेट से रोपनी कराने पर बढ़ रहा खर्च
हाजीपुर के किसान महेश भगत, अरविंद कुमार मिश्रा और राहुल सिंह तथा पातेपुर के किसान बालेश्वर राय, चंद्रदीप सिंह, राजापाकर के किसान विशुन धारी राय और अखिलेश शर्मा ने बताया कि धान रोपनी के महत्वपूर्ण समय पर बारिश नहीं होने से किसानों को भारी आर्थिक बोझ झेलना पड़ रहा है.
किसानों का कहना है कि जिनका बिचड़ा तैयार हो चुका था, उन्हें मजबूरी में पंपिंग सेट या अन्य साधनों से खेतों में पानी पहुंचाकर रोपनी करनी पड़ रही है. अधिकांश किसानों के पास अपनी बोरिंग या पंपिंग सेट नहीं है. ऐसे में उन्हें किराये पर पंपिंग सेट लेना पड़ रहा है, जिसके लिए लगभग 100 रुपये प्रति घंटा अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि कई क्षेत्रों में पंपिंग सेट की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं है, जिससे धान रोपनी का कार्य प्रभावित हो रहा है और फसल आच्छादन लक्ष्य पर भी असर पड़ रहा है.
एक सप्ताह से नहीं हुई बारिश
किसानों ने बताया कि मॉनसून की शुरुआत में हुई बारिश से अच्छी पैदावार की उम्मीद जगी थी. इसी भरोसे कई किसानों ने कर्ज लेकर खेती की तैयारी की थी. लेकिन जैसे ही बिचड़ा तैयार हुआ, बारिश पूरी तरह बंद हो गई.
पिछले एक सप्ताह से बारिश नहीं होने के कारण खेतों में नमी कम हो रही है. किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में भी बारिश नहीं हुई तो जिन किसानों ने बोरिंग या समर्सिबल की मदद से रोपनी कर ली है, उन्हें भी सिंचाई करनी पड़ेगी, जिससे लागत और बढ़ जाएगी.
सब्जी उत्पादकों को मिला लाभ, लेकिन बाजार भाव नहीं
किसानों का कहना है कि बारिश कम होने से सब्जी उत्पादकों को कुछ हद तक फायदा हुआ है, क्योंकि फसल को नुकसान कम हुआ है. हालांकि उत्पादन अधिक होने के कारण बाजार में सब्जियों के उचित दाम नहीं मिल रहे हैं, जिससे उन्हें भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
