हाजीपुर को जलजमाव से राहत दिलाने वाली 129 करोड़ की ड्रेनेज योजना अधर में, इस साल भी लोगों की बढ़ेगी परेशानी

Hajipur News : हाजीपुर शहर जलजमाव की गंभीर समस्या से जूझ रहा है, लेकिन 129 करोड़ की महत्वाकांक्षी स्ट्रॉम वाटर ड्रेनेज सिस्टम योजना चार साल बाद भी अधर में अटकी है. विभागीय अड़चनों और समन्वय की कमी के चलते इस साल भी मानसून में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

Hajipur News : हाजीपुर शहर को जलजमाव की समस्या से स्थायी राहत दिलाने के लिए प्रस्तावित 129 करोड़ रुपये की स्ट्रॉम वाटर ड्रेनेज सिस्टम योजना फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई है. करीब चार वर्ष पहले भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) के सहयोग से इस महत्वाकांक्षी योजना को तैयार किया गया था, लेकिन विभागीय पेंच, नगर परिषद और बुडको के बीच समन्वय की कमी तथा न्यायालय में मामला लंबित होने के कारण योजना पर काम शुरू नहीं हो सका है.

चार साल बाद भी शुरू नहीं हो सकी योजना

जानकारी के अनुसार, इस परियोजना को दो चरणों में पूरा किया जाना था. योजना का उद्देश्य पूरे हाजीपुर शहर को जलजमाव की समस्या से स्थायी मुक्ति दिलाना था. इसके लिए लगभग 129 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे. हालांकि, योजना को लेकर न तो नगर परिषद की ओर से कोई ठोस पहल की जा रही है और न ही जिला प्रशासन इस दिशा में सक्रिय नजर आ रहा है. स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से भी इस मामले में कोई विशेष पहल सामने नहीं आई है.

इस वर्ष भी जलजमाव की समस्या झेलेंगे शहरवासी

भौगोलिक दृष्टि से हाजीपुर शहर कटोरेनुमा क्षेत्र में बसा हुआ है. शहर के चारों ओर ऊंची जमीन होने के कारण वर्षा का पानी आसानी से बाहर नहीं निकल पाता. ऐसे में भारी बारिश के दौरान जलजमाव की समस्या हर वर्ष विकराल रूप ले लेती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बरसात के समय जल निकासी के लिए अस्थायी उपाय किए जाते हैं. नालों की सफाई, मरम्मत और टैंकरों की व्यवस्था पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल सका है.

28 किलोमीटर नाला और संप हाउस बनाने की थी योजना

नगर परिषद के अधिकारियों के अनुसार, तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी पंकज कुमार की पहल पर भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) की मदद से स्ट्रॉम वाटर ड्रेनेज सिस्टम की योजना तैयार की गई थी. योजना के तहत शहर में लगभग 28 किलोमीटर पक्के नालों का निर्माण और शहर के चारों ओर बड़े-बड़े संप हाउस बनाए जाने थे. विस्तृत सर्वे के बाद परियोजना की डीपीआर तैयार की गई थी और सरकार से भी इसकी मंजूरी मिल गई थी. नगर परिषद बोर्ड ने भी इसे दो चरणों में पूरा करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी थी.

बुडको की एंट्री के बाद फंसा मामला

अधिकारियों के अनुसार, योजना को लागू करने की प्रक्रिया के दौरान बुडको की एंट्री हुई, जिसके बाद मामला उलझ गया. वर्तमान में यह मामला न्यायालय में लंबित बताया जा रहा है. इसी कारण परियोजना पर काम शुरू नहीं हो सका है. ऐसे में इस वर्ष भी हाजीपुर के लोगों को मानसून के दौरान जलजमाव की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है.

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Author: Gopal kumar roy

Published by: Yuvraj Ratan

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