हाजीपुर में राजद का आक्रोश मार्च, छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में धर्मेंद्र प्रधान का किया पुतला दहन

दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज के विरोध में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने हाजीपुर में आक्रोश मार्च निकाला. इस दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन किया गया.

Hajipur RJD protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज के विरोध में गुरुवार की शाम राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने हाजीपुर में आक्रोश मार्च निकाला. हाजीपुर जंक्शन से रमाशीष चौक तक निकाले गए मार्च में बड़ी संख्या में राजद कार्यकर्ता, छात्र-छात्राएं और समर्थक शामिल हुए. इस दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन किया गया.

सुरक्षा के बीच निकला विरोध मार्च

प्रदर्शन को देखते हुए हाजीपुर स्टेशन परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे. किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था. पुलिस की निगरानी में पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ.


डॉ. मुकेश रोशन ने सरकार पर साधा निशाना

आक्रोश मार्च का नेतृत्व महुआ के पूर्व विधायक और राजद नेता डॉ. मुकेश रोशन ने किया. उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ हुई कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है. उन्होंने आरोप लगाया कि नीट, यूपीएससी सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है. उन्होंने कहा कि राजद और महागठबंधन छात्रों के संघर्ष में उनके साथ खड़े हैं और उन्हें न्याय दिलाने के लिए सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई जारी रखेंगे.

इस्तीफे की मांग और आंदोलन जारी रखने का ऐलान

डॉ. मुकेश रोशन ने कहा कि जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और सरकार उनकी समस्याओं के समाधान के बजाय राजनीति कर रही है.

छात्रों और महिलाओं पर बल प्रयोग का आरोप

राजद नेता ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों और महिलाओं पर बल प्रयोग किया गया, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि विरोध-प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और सरकार को दमनात्मक कार्रवाई के बजाय छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए. मार्च के दौरान कार्यकर्ताओं ने छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की.


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By Kaif ahmed

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