गांधी स्मारक पुस्तकालय में सजी मासांत कवि गोष्ठी, कविता और गजल की रसधारा में डूबे श्रोता

हाजीपुर के गांधी स्मारक पुस्तकालय में सोमवार को एक विशेष मासांत कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया. इस आयोजन में कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को देर शाम तक बांधे रखा. सामाजिक सरोकारों और व्यवस्था पर रचनात्मक प्रहार के साथ गजल और कविताओं की रसधारा बही.

Hajipur News : हाजीपुर शहर के गांधी आश्रम स्थित गांधी स्मारक पुस्तकालय में सोमवार को मासांत कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता गजलकार सीताराम सिंह ने की, जबकि संचालन डॉ. नंदेश्वर प्रसाद सिंह ने किया. गोष्ठी में कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर श्रोताओं को देर शाम तक बांधे रखा.

गजल से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कवयित्री साधना कृष्ण ने अपनी गजल "करें उसका ही शुकराना हसीं जो जिंदगी दी है, दी है जेहन में जो खुशियां तो आंखों में नमी दी है..." सुनाकर काव्यपाठ की शुरुआत की. उनकी प्रस्तुति को श्रोताओं ने खूब सराहा.

सामाजिक सरोकार और व्यवस्था पर रचनात्मक प्रहार

डॉ. अशोक कुमार सिंह ने "भूल गया मानव मर्यादा..." कविता के माध्यम से सामाजिक मूल्यों के क्षरण पर चिंता जताई. वहीं बज्जिका साहित्यकार अखौरी चंद्रशेखर ने "दिल्ली से चलता एक रुपैया, मिलता पंद्रह पैसा है..." सुनाकर लोकतांत्रिक व्यवस्था की विसंगतियों पर व्यंग्य किया.

देर शाम तक गूंजती रहीं कविताएं

काव्य गोष्ठी में चांदनी भारती, शंभु शरण मिश्र, आशुतोष कुमार सिंह और डॉ. नंदेश्वर प्रसाद सिंह ने भी अपनी कविताओं और व्यंग्य रचनाओं का पाठ कर खूब तालियां बटोरीं. अध्यक्षीय काव्यपाठ में सीताराम सिंह ने अपनी गजल "निकले घर से पैतरेबाज दिखाने अपना दम..." सुनाकर समां बांध दिया.

साहित्य प्रेमियों की रही उपस्थिति

कार्यक्रम के अंत में पुस्तकालय के सहसचिव सुमन कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया. इस अवसर पर प्रो. उमानाथ साह, विकास कुमार, राजेश पराशर, हर्षवर्धन, श्याम सलोने सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे.


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By Devendra gupt

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