Hajipur News : भगवानपुर प्रखंड स्थित शंभूपुर कोआरी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में गुरुवार को 'बाल विवाह मुक्त भारत अभियान' के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें शिक्षा, समान अवसर और बाल अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाना था. इस अवसर पर चित्रकला, स्लोगन और निबंध लेखन प्रतियोगिता के सफल प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम का आयोजन स्वर्गीय कन्हाई शुक्ला सामाजिक सेवा संस्थान एवं जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया. इसकी अध्यक्षता विद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य आशुतोष कुमार ने की, जबकि संचालन अधिकार मित्र संतोष कुमार ने किया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पंचायत की मुखिया अंजुला कुमारी उपस्थित रहीं.
2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत बनाने का संकल्प
कार्यक्रम के मुख्य आयोजक एवं जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के निदेशक डॉ. सुधीर कुमार शुक्ला ने कहा कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक कुरीति नहीं, बल्कि बच्चों के संवैधानिक और मानवीय अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि जब तक प्रत्येक बच्चा सुरक्षित, शिक्षित और सशक्त नहीं होगा, तब तक विकसित भारत का सपना अधूरा रहेगा. उन्होंने बताया कि भारत ने वर्ष 2030 तक देश को बाल विवाह मुक्त बनाने का राष्ट्रीय संकल्प लिया है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए समाज, विद्यालय, अभिभावकों, प्रशासन और युवाओं को मिलकर जन-जागरूकता की मजबूत श्रृंखला तैयार करनी होगी. उन्होंने विद्यार्थियों से अपने परिवार और समाज में भी बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैलाने का आह्वान किया.
कम उम्र में विवाह बच्चों के भविष्य पर डालता है नकारात्मक प्रभाव
कार्यक्रम का संचालन कर रहे अधिकार मित्र संतोष कुमार ने बाल विवाह के दुष्परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि कम उम्र में विवाह बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा, मानसिक विकास और भविष्य पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डालता है. प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार है. उन्होंने कहा कि बाल विवाह की किसी भी घटना की सूचना संबंधित प्रशासन या चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 तक पहुंचाना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है.
बाल विवाह उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी बाधा
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रभारी प्रधानाचार्य आशुतोष कुमार ने कहा कि बाल विवाह बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है. उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और समाज में बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ जागरूकता फैलाने का आह्वान किया.
मुख्य अतिथि अंजुला कुमारी ने कहा कि बाल विवाह केवल एक परिवार नहीं, बल्कि पूरे समाज की समस्या है. प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानपूर्ण जीवन का अधिकार है. समाज के प्रत्येक नागरिक को इस कुप्रथा को समाप्त करने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए.
प्रतियोगिताओं के विजेताओं को किया गया सम्मानित
चित्रकला प्रतियोगिता में वंदना कुमारी ने प्रथम, माही कुमारी ने द्वितीय और जानवी कुमारी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया. स्लोगन प्रतियोगिता में सौम्या कुमारी प्रथम, संध्या कुमारी द्वितीय और नंदनी कुमारी तृतीय स्थान पर रहीं. वहीं, निबंध लेखन प्रतियोगिता में सृष्टि कुमारी प्रथम, एरम अमीमा द्वितीय और प्रिया कुमारी ने तृतीय स्थान हासिल किया.
बाल विवाह उन्मूलन का लिया सामूहिक संकल्प
कार्यक्रम का समापन वर्ष 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त बनाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ. सभी छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अतिथियों ने बाल विवाह जैसी कुप्रथा के उन्मूलन तथा प्रत्येक बच्चे के सुरक्षित, शिक्षित और सम्मानजनक भविष्य के निर्माण के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया.
Also Read : हाजीपुर में 24 जुलाई को लगेगा सोलर मेला, एक ही जगह मिलेगी आवेदन, लोन और सब्सिडी की सुविधा
