Hajipur News : हाजीपुर शहर के आरएन कॉलेज परिसर में विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा , बिहार के आह्वान पर प्रस्तावित बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन की तैयारी को लेकर संयुक्त बैठक आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता बिहार विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (बूटा) की अध्यक्ष प्रो. किरण कुमारी ने की, जबकि संचालन बूटा सचिव डॉ. शशि भूषण कुमार ने किया.
स्वायत्तता पर खतरे का जताया आरोप
बैठक में प्रस्तावित अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों पर चर्चा करते हुए इसे विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्वायत्तता, शैक्षणिक स्वतंत्रता तथा लोकतांत्रिक प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताया गया. पेंशनर्स सोसाइटी के उपाध्यक्ष प्रो. नवल किशोर शर्मा ने कहा कि यदि यह विधेयक पारित होता है तो विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता प्रभावित होगी तथा सरकारी नियंत्रण बढ़ जाएगा. इससे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और अकादमिक स्वतंत्रता पर प्रतिकूल असर पड़ेगा.
5 से 8 अगस्त तक काली पट्टी बांधकर होगा विरोध
शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अरविंद कुमार ने आंदोलन के कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि 5 से 8 अगस्त तक सभी शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी अपने-अपने कार्यस्थल पर काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज करेंगे. 10 अगस्त को मास कैजुअल लीव लेकर विश्वविद्यालय मुख्यालय पर प्रदर्शन किया जाएगा तथा कुलपति को ज्ञापन सौंपा जाएगा.
घंटी बजाकर भी जताएंगे विरोध
उन्होंने बताया कि 11 से 25 अगस्त तक प्रतिदिन अपराह्न 1:30 बजे से 2 बजे तक सभी शिक्षक और कर्मचारी अपने कार्यस्थल पर घंटी बजाकर विरोध दर्ज करेंगे. वहीं 5 सितंबर को विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के साथ प्रस्तावित विधेयक के प्रभावों पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा.
एकजुट होकर आंदोलन सफल बनाने का संकल्प
बैठक को संबोधित करते हुए पूर्व प्राचार्य प्रो. रवि सिन्हा ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता केवल शिक्षकों का नहीं, बल्कि पूरे समाज और भावी पीढ़ी के हितों का विषय है. शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघ के सदस्य संदीप कुमार और राजकिशोर सिंह ने भी प्रस्तावित विधेयक का विरोध करते हुए आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने की बात कही. बैठक में उपस्थित सभी शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने चरणबद्ध आंदोलन को सफल बनाने तथा विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, शिक्षा की गुणवत्ता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया.
