1932 से चल रही सासामुसा चीनी मिल पर संकट, किसानों ने छेड़ा आंदोलन, कर्नाटक से क्या है कनेक्शन

Sasamusa Sugar Mill: सासामुसा चीनी मिल की मशीनों को स्क्रैप में बेचने के फैसले से किसानों और मजदूरों में भारी नाराजगी है. मिल को चालू कराने और बकाया भुगतान की मांग को लेकर किसान आंदोलन पर उतर आए हैं और अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी दी है.

Sasamusa Sugar Mill: सासामुसा चीनी मिल की मशीनों को स्क्रैप में नीलाम किये जाने के बाद इलाके के किसानों में भारी आक्रोश है. स्क्रैप काटे जाने के विरोध में रविवार को किसान आंदोलन पर उतर आये. किसान संघर्ष समिति के बैनर तले धरना दिया गया. धरना में किसानों के प्रतिनिधियों के साथ चीनी मिल मजदूर यूनियन के लोग भी शामिल हुए.

आर-पार की लड़ाई की तैयारी

धरना को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने कहा कि वर्ष 1932 से सासामुसा चीनी मिल चल रही है और यह क्षेत्र के किसानों की समृद्धि का प्रतीक रही है. चीनी मिल प्रबंधन के गलत निर्णयों की सजा किसानों को क्यों दी जा रही है.

सरकार ने सासामुसा चीनी मिल को चालू कराने का निर्णय लिया है. ऐसे में स्क्रैप की नीलामी के आदेश पर पुनर्विचार कर फैक्ट्री को चालू कराया जाये. इससे किसानों और मजदूरों का जीवन-यापन संभव हो सकेगा.

किसान नेताओं ने कहा कि चंद लोगों की राजनीति के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है. सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर फैक्ट्री को चालू कराना चाहिए और किसानों व मजदूरों के बकाये का भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए.

किसानों ने चेतावनी दी कि अब आर-पार की लड़ाई लड़ी जायेगी. सासामुसा चीनी मिल को चालू कराने के लिए जिले के सभी राजनीतिक दलों को दलीय भावना से ऊपर उठकर खुलकर सहयोग करना होगा, जो फिलहाल संभव नहीं हो पा रहा है.

सासामुसा चीनी के गेट पर धरना पर बैठे किसान

कर्नाटक की कंपनी को टेंडर के माध्यम से दिया गया है स्क्रैप

किसानों ने 15 दिसंबर से धरना को अनिश्चितकालीन करने का अल्टीमेटम दिया है. नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने सेंट्रल बैंक की अपील पर सासामुसा चीनी मिल में रखी चीनी को 11 करोड़ रुपये में बेचने के बाद अब कर्नाटक की एक कंपनी को फैक्ट्री के लोहा को स्क्रैप में बेचने की निविदा फाइनल कर दी है.

स्क्रैप खरीदने वाली कंपनी को चीनी मिल की मशीनों और लोहा को काटने व बेचने के लिए अधिकृत कर दिया गया है. सात दिसंबर को जैसे ही किसानों और उनके प्रतिनिधियों को चीनी मिल की मशीनें काटे जाने के लिए टीम के पहुंचने की जानकारी मिली. किसान अपने प्रतिनिधियों के साथ मौके पर पहुंचे और जमकर विरोध किया. इसके बाद किसानों ने संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है.

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मामला दर्ज होने के बाद डायरेक्टरों के स्वामित्व को किया गया था खत्म

जानकार सूत्रों के अनुसार सेंट्रल बैंक के 40 करोड़ रुपये के ऋण के विरुद्ध नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में बैंक की ओर से दाखिल मामले की सुनवाई के दौरान चीनी मिल मालिक महमूद अली, शहीद अली, साजिद अली समेत सभी निदेशकों का स्वामित्व समाप्त कर दिया गया था. ट्रिब्यूनल के आदेश पर चीनी मिल के गोदाम में रखी करीब 11 करोड़ रुपये की चीनी की बिक्री कर ऋण के एवज में बैंक में राशि जमा करायी जा चुकी है.

अब स्क्रैप को लगभग 18.5 करोड़ रुपये में बेचकर बैंक में राशि जमा की जानी है. इसके बाद मिल की जमीन की नीलामी होने के भी आसार जताये जा रहे हैं. बैंक की ओर से अब मूलधन और ब्याज को जोड़कर सौ करोड़ रुपये से अधिक का दावा किया जा रहा है.

किसान व कर्मियों के बकाये पर साधी गयी चुप्पी

एनसीएलटी कोलकाता द्वारा नियुक्त आइआरपी सचिन गोपाल जठार के समक्ष सभी पक्षों की ओर से अपने-अपने दावे प्रपत्र में भरकर जमा किये गये थे. सासामुसा चीनी मिल के किसानों के 46.36 करोड़ रुपये बकाये तथा चीनी मिल के श्रमिकों, अधिकारियों और कर्मियों के बकाये भुगतान को लेकर भी दावा प्रस्तुत किया गया था. किसानों का आरोप है कि इन दावों पर अब तक कोई विचार नहीं किया गया है.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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